मोदी सरकार का एक साल- शानदार, पर मंजिल है दूर
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार इस महीने 26 मई को अपना एक साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। उसका एक साल उसके चुनावी वादों को निभाने के स्तर पर कितना खरा बेहतर रहा, इस मसले पर बहस शुरू हो गई है।

बहस का बिन्दु
बहस का एक बिन्दु ये भी है कि मोदी सरकार का कार्यकाल पिछली मनमोहन सिंह के कार्यकाल से किस तरह से अलग है। कहने की जरूरत नहीं है कि अगर मनमोहन सिंह के दस सालों के कार्यकाल के अंतिम एक साल की तुलना मोदी सरकार के पहले एक साल से की जाए तो साफ हो जाएगा कि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर रहा।
घोटालों की सरकार
जहां मनमोहन सरकार तमाम घोटालों के आरोपों को झेल रही थीं, वही मोदी सरकार पर किसी ने एक भी स्कैम का आरोप लगाने की हिम्मत नहीं दिखाई। इस मोर्चे पर मोदी सरकार का रिकार्ड शानदार रहा है। मोदी ने इस एक साल के दौरान कई बार कहा कि इन्हें 60 साल दिए, मुझे 60 महीने दो। उनकी इस मांग में दम है। कम से कम मोदी के कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए पांच साल का तो वक्त दिया जाना चाहिए।
विदेश नीति के मोर्च पर
अगर विदेश नीति की बात करे तो मोदी ने अमेरिका, चीन,रूस जैसी विश्व शक्तियों से संबंधों को नए सिरे से लिखने की चेष्टा की। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबाम ने गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि की हैसियत से शिरकत की। ये बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है मोदी सरकार की।
चीन के राष्ट्रपति भी भारत आए। रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी भारत आए। अब मोदी खुद चीन जा रहे हैं। नेपाल में भूकंप की बात हो या यमन से भारतीयों को सुरक्षित निकालने का मसला हो, सब स्तरों पर मोदी सराकर ने बेहद शनादार काम किया।
बिग ब्रदर नहीं
मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क नेताओं को बुलाकर साफ कर दिया कि भारत अपने पड़ोसी देशों से संबंधों को मजबूती देना चाहता है। वह बिग ब्रदर की मानसिकता नहीं रखता।
इसके विपरीत मनमोहन सरकार ने अपनी दूसरी पारी में मानो तय कर लिया था कि वे कोई काम करेंगे ही नहीं। सरकार पंगु हो गई थी। कोई किसी की नहीं सुन रहा था। आम आदमी से लेकर उद्योगपति सरकार की काहिली से परेशान थे।
अहम कदम
मोदी सरकार ने देश में भी अहम कदम उठाए गंभीर मसलों पर। मोदी ने कश्मीर में आई बाढ़ का खुद जायजा लेकर वहां पर पर्याप्त मदद पहुंचाई। माओवादियों के गढ़ छतीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भी जाकर उन्होंने साफ संकेत दिए कि सरकार इस क्षेत्र के विकास को लेकर प्रतिबद्द है। यूपीए सरकार के दौरान तो आपको याद होगा कि माओवादियों से किस तरह से निपटा जाए, इस सवाल पर पी.चिदंबरम और दिग्विजय सिंह में सार्वजिनक रूप से तकरार हुई थी।
बात आर्थिक मोर्चे की
अब आर्थिक मोर्चे की भी बात कर ली जाए। देश की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौटने लगी है। माना जा रहा है कि देश 7 फीसद की विकास दर हासिल कर लेगा। मनमोहन सिंह के दौर में हालात बेहद खराब हो गए थे। मुद्रास्फीति की दर बढ़ती जा रही थी। अब इसे काबू पा लिया गया है। डिफेंस और इंश्योरेंस सेक्टरों में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ाने की अनुमति दे दी गई है। कहने की जरूरत नहीं है कि इसके चलते रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पर, मोदी सरकार को स्वच्छ भारत अभियान, गंगा सफाई अभियान, स्किल इंडिया अभियान को और गति देनी होगी। देश के निर्धन लोगों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना बेहतर योजना मानी जा सकती है। इसे और बेहतर तरीके लागू करना होगा। कुल मिलाकर मोदी सरकार का पहला साल उपलब्धियों से भरा रहा है। हां, इसे अभी और बहुत कुछ करना है।












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