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One Nation One Election: देश में पहली बार कब और कैसे हुआ था ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’? क्यों टूटी परंपरा? जानें

One Nation One Election: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का 'एक देश-एक चुनाव' (One Nation One Election) व्यवस्था का सपना अब हकीकत बनने की कगार पर है। 12 दिसंबर यानी गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार ने इस बिल को मंजूरी दे दी। अब यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। बिल के कानून बनते ही, देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकेंगे।

भारत में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का विचार नया नहीं है। आजादी के शुरुआती सालों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाते थे। 1951-52 से लेकर 1967 तक यह व्यवस्था लागू रही। हालांकि, बाद में राजनीतिक अस्थिरता और विधानसभा भंग होने की वजह से यह परंपरा टूट गई। आइए जानते हैं, इस व्यवस्था का इतिहास और इसे लागू करने की चुनौतियां...

One Nation One Election History

पहली बार कब हुआ 'एक राष्ट्र, एक चुनाव'?

स्वतंत्र भारत में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ। इस दौरान लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए। इसके बाद 1957, 1962, और 1967 में भी एक साथ चुनाव हुए।

व्यवस्था क्यों टूटी?
1967 के बाद, राजनीतिक अस्थिरता के चलते कई राज्य विधानसभाएं अपने कार्यकाल से पहले ही भंग हो गईं।
1968-69: कुछ राज्यों में समय से पहले चुनाव कराए गए।
1970: लोकसभा भंग हो गई, जिससे 1971 में मध्यावधि चुनाव हुए।
इसके बाद लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे।

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की ऐतिहासिक इतिहास
1951-52 लोकसभा चुनाव: देश का पहला आम चुनाव। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ मतदान हुआ। इन शुरुआती चुनावों में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया।

  • 1952: 364 सीटें
  • 1957: 371 सीटें
  • 1962: 361 सीटें
  • 1967: 283 सीटें (कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर हुआ)

1951-52 के चुनाव कैसे आयोजित किए गए?

चुनावी तैयारी

  • चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई।
  • सुकेमार सेन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
  • लगभग 17.3 करोड़ मतदाता पंजीकृत हुए, जिनमें से 15.6 करोड़ को अंतिम सूची में शामिल किया गया।

क्या होती थी मतदान प्रक्रिया?

  • हर उम्मीदवार के लिए अलग रंग के बैलट बॉक्स बनाए गए।
  • 2.12 करोड़ लोहे के बैलट बॉक्स और 62 करोड़ मतपत्र तैयार किए गए।
  • मतदान 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक चरणबद्ध तरीके से हुआ।

क्या रहीं तकनीकी चुनौतियां?

  • कम साक्षरता दर (16.6%) के कारण मतपत्रों पर चुनाव चिह्न का उपयोग किया गया।
  • 56,000 पोलिंग बूथ बनाए गए और 2 लाख से अधिक बैलट बॉक्स तैयार किए गए।

कैसे आए नतीजे?

  • कुल 489 सीटों पर चुनाव हुआ। कांग्रेस ने 364 सीटें जीतीं और जवाहरलाल नेहरू पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। 46% मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया।

ये भी पढ़ें- भारत के 'One Nation-One Election' का इन 7 देशों में छिपा है मूल-मंत्र, जानें कहां से क्या लिया?

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के फायदे

  • संसाधनों की बचत: बार-बार चुनाव होने से समय और धन की बर्बादी होती है।
  • प्रशासनिक स्थिरता: केंद्र और राज्यों में एक साथ सरकार बनने से नीतियों में तालमेल रहता है।
  • विकास कार्य: बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य रुक जाते हैं।

वर्तमान में क्या हैं चुनौतियां?

  • संवैधानिक संशोधन: लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल को समायोजित करने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है।
  • राजनीतिक सहमति: सभी राज्यों और राजनीतिक दलों की सहमति प्राप्त करना मुश्किल है।
  • व्यावहारिक अड़चनें: चुनाव के लिए बड़े स्तर पर लॉजिस्टिक्स और तैयारी की जरूरत होगी।

ये भी पढ़ें- One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव बिल को मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, जल्द सदन में होगा पेश!

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