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One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव बिल को मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, जल्द सदन में होगा पेश!

One Nation One Election: मोदी सरकार का महत्वाकांक्षी 'एक देश-एक चुनाव' (One Nation One Election) का सपना अब हकीकत बनने के करीब है। 12 दिसंबर यानी गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार ने इस बिल को मंजूरी दे दी।

सूत्रों के मुताबिक, अब यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। अगर यह कानून बनता है, तो देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकेंगे। आइए, जानते हैं इस बिल से जुड़ी अहम बातें ...

One Nation One Election Bill

'एक देश-एक चुनाव' क्या है?

इस योजना के तहत देशभर में एक ही समय पर लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाएंगे। अभी भारत में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं, जिससे प्रशासन, विकास कार्य और सरकारी संसाधनों पर असर पड़ता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार लंबे समय से इस विचार को आगे बढ़ा रही है। इसे देश के समय और संसाधनों की बचत के लिए जरूरी कदम माना जा रहा है।

क्यों है यह बिल जरूरी?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति में बाधा डालते हैं। हर चुनाव में भारी मात्रा में समय, धन और सरकारी संसाधन खर्च होते हैं। उनका कहना है कि जब एक बार में सभी चुनाव हो जाएंगे, तो सरकार का ध्यान पूरी तरह से विकास कार्यों और योजनाओं पर केंद्रित हो सकेगा।

अब तक क्या हुआ?

  • 18 सितंबर 2024: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
  • रामनाथ कोविंद समिति: एक उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई है। इस समिति ने देशभर में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी।
  • 12 दिसंबर 2024: केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी, जिसे अब संसद में पेश किया जाएगा।

क्या हैं फायदे?

  • संसाधनों की बचत: बार-बार चुनाव में खर्च होने वाले पैसे और समय की बचत होगी।
  • स्थिरता: सभी सरकारें एक साथ काम करेंगी, जिससे नीतियों में तालमेल बनेगा।
  • प्रशासनिक सुगमता: प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान चुनाव प्रक्रिया से हटकर विकास कार्यों पर जाएगा।

चुनौतियां क्या हैं?
हालांकि इस बिल के फायदे कई हैं, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी। साथ ही, कई राज्य सरकारें इसे लेकर सहमत नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके अधिकार सीमित हो सकते हैं।

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अब क्या होगा?
बिल संसद में पेश किया जाएगा और बहस के बाद इसे कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। अगर यह बिल पास होता है, तो आने वाले सालों में भारत में चुनाव कराने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

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