वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर रामनाथ कोविंद ने बुलाई पहली मीटिंग!
One Nation, One Election : मोदी सरकार ने लोकसभा, विधानसभाओं,नगर पालिकाओं और साथ ही पंचायतों चुनावों को एक साथ कराने के मुद्दे पर गौर करने के लिए बीते शनिवार को 8 सदस्यों की कमेटी गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं।

इस समिति में 8 सदस्य शामिल हैं। मीडिया सूत्रों के मुताबिक आज इस कमेटी की पहली बैठक होने वाली है, कहा जा रहा है कि आज तीन बजे रामनाथ कोविंद 'वन नेशन-वन इलेक्शन 'को लेकर अपने घर पर बैठक करेंगे।
क्या है 'वन नेशन-वन इलेक्शन '?
'वन नेशन-वन इलेक्शन ' का मतलब सभी चुनावों को सिंक्रनाइज करना है, जिससे निश्चित सीमा में एक साथ चुनाव भी हो और चुनाव की लागत में भी कमी आए क्योंकि चुनाव कराने में वित्तीय संसाधनों की प्रचुर मात्रा में जरूरत होती है और काफी खर्चा होता है। अगर एक साथ चुनाव होंगे तो प्रशासनिक और सुरक्षा बलों पर दवाब भी कम होगा।
'एक राष्ट्र एक चुनाव' का विरोध, विपक्ष ने लगाया सरकार पर आरोप
हालांकि मोदी सरकार के इस प्रस्ताव पर विपक्ष उबल पड़ा है। उसका कहना है कि 'ये संघवाद की दादागिरी है जो कि क्षेत्रीय लोकतंत्र को कमजोर कर देगा। इस तरह की व्यवस्था से नेशनल पार्टियों की तो फायदा होगा लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।'
पार्टियों का होगा काम पर फोकस, पैसे की होगी बचत
हालांकि जो लोग इसका समर्थन कर रहे हैं वो कह रहे हैं कि इस तरह की व्यवस्था से पैसे और वक्त की बचत तो होगी ही साथ ही पार्टियों की ध्यान शासन पर होगा ना कि चुनावी रैलियों पर, इसमें जनता का ही फायदा है क्योंकि पार्टियों को जनता के लिए काम करने का ज्यादा वक्त मिलेगा।
क्या भारत बनेगा इस मामले में विश्व का चौथा देश?
हालांकि ये इतना आसान नहीं है क्योंकि 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है। आपको बता दें कि इस तरह की व्यवस्था अगर सच में भारत में लागू होती है तो ऐसा करने वाला वो विश्व का चौथा देश बन जाएगा। विश्व में दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम और स्वीडन ही ऐसे देश हैं जहां 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के तहत चुनाव होते हैं।












Click it and Unblock the Notifications