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One Nation One Election: वन नेशन-वन इलेक्शन के फायदे-नुकसान क्‍या हैं? आसान भाषा में समझें पूरा गणित

One Nation One Election ke Fayde Nuksan: संसद के शीतकालीन सत्र 2024 में 12 दिसंबर को एक देश, एक चुनाव के विधेयक को गुरुवार को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि अब केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्‍शन बिल को सदन के पटल पर रख सकती है। विधेयक अगले सप्ताह इसी शीतकालीन सत्र में लाए जाने की संभावना है।

इससे पहले भारत में वन नेशन-वन इलेक्शन (एक राष्ट्र, एक चुनाव) के प्रस्ताव को 18 सितंबर 2024 को मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि लोकसभा चुनाव के साथ-साथ सभी राज्‍यों में विधानसभा और स्थानीय निकाय नगर निगम, नगर पालिका व ग्राम पंचायतों तक के चुनाव एक साथ हों।

केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अगर देश में वन नेशन-वन इलेक्शन की व्‍यस्‍था लागू करती है तो इसके अपने फायदे व नुकसान भी हैं। आईए आसान भाषा में समझिए वन नेशन-वन इलेक्शन का पूरा गणित।

One Nation One Election ke Fayde Nuksan

वन नेशन-वन इलेक्शन से फायदे

  • 1. चुनाव खर्च घट जाएगा: चुनाव खर्च को ट्रैक करने वाले गैर लाभकारी संगठन सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) ने अनुमान लगाया था कि लोकसभा चुनाव 2023 में एक लाख करोड़ रुपए खर्च होने वाले हैं, जो साल 2019 के लोकसभा चुनाव से दोगुना थे।
  • अब लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्‍यों में विधानसभा, स्‍थानीय निकाय और पंचायत चुनाव होंगे तो उनके चुनाव के लिए अलग से खर्च नहीं करना पड़ेगा।
  • 2. बार-बार आचार संहिता से मुक्ति: चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही संबंधित क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो जाती है, जिसमें सरकारी कर्मचारी-अधिकारी चुनावी मोड में चले जाते हैं और आमजन के काम-काज अटक जाते हैं। बार-बार चुनाव होने से इस स्थिति का सामना बार-बार करना पड़ता है जबकि वन नेशन-वन इलेक्शन से बार-बार लगने वाली आचार संहिता से मुक्ति मिल जाएगी।
  • 3. सुरक्षा बलों पर बोझ कम: चुनावों में सुरक्षा का जिम्‍मा स्‍थानीय पुलिस के साथ सुरक्षा बलों के जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है। चुनाव में बार-बार लगने वाली ड्यूटी से निजात मिलने पर सुरक्षा बलों पर काम का बोझ कम होगा।
  • 4. विकास कार्यों में तेजी आएगी: चुनाव आचार संहिता में विकास कार्यों पर भी ब्रेक लग जाते हैं। अब तक देश में हर जगह ऐसा बार-बार होता है, मगर वन नेशन-वन इलेक्शन से पांच साल में ऐसा सिर्फ एक बार होगा। इसलिए विकास कार्यों में तेजी आएगी।

वन नेशन-वन इलेक्शन के नुकसान

  • 1. राज्य स्तर के मुद्दे दब जाएंगे: वन नेशन-वन इलेक्‍शन पर राजनीतिक दलों में एक राय नहीं बन पा रही है। इसकी वजह यह है कि क्षेत्रीय दलों को लगता है कि इस व्‍यवस्‍था का फायदा सिर्फ राष्‍ट्रीय दलों को ही होगा।
  • क्षेत्रीय दलों को इससे नुकसान नहीं होने वाला है, क्‍योंकि राष्ट्रीय मुद्दों के सामने राज्य स्तर के मुद्दे दब जाएंगे। इससे राज्यों का विकास प्रभावित होगा।
  • 2. चुनाव के परिणाम: एक नुकसान यह भी माना जा रहा है कि अगर देश में किसी एक दल की लहर और एक साथ चुनाव हो तो इससे चुनाव के परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
  • 3. राज्‍यों सरकारों की मनमानी बढेगी: माना जा रहा है कि वन नेशन वन इलेक्‍शन व्‍यवस्‍था लागू होने से एक यह नुकसान भी होगा कि राज्‍यों की सरकारें निरंकुश हो जाएंगी।
  • 4. एकमुश्‍त लोड नहीं: वन नेशन वन इलेक्‍शन के लागू होने के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम की खरीद के लिए हर 15 साल में लगभग ₹10,000 करोड़ की आवर्ती लागत का अनुमान लगाया है। जो कि अभी किस्तों में खर्च होती रहती है, जिससे एकमुश्‍त लोड नहीं आता।

पीएम मोदी ने 'एक देश एक चुनाव' की वकालत की

पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं का मानना है कि देश में बार-बार चुनाव होने से विकास में बाधा है। इस बात का जिक्र पीएम मोदी ने 15 अगस्‍त 2024 को लाल किले से अपने भाषण में किया है।
'एक देश एक चुनाव' की वकालत करते हुए पीएम मोदी ने स्वाधीनता दिवस समारोह भाषण में राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि देश की तरक्‍की के लिए हम सबको इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी वन नेशन वन इलेक्‍शन की बात को प्रमुखता से शामिल किया था।

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