'प्लीज उसे बचा लीजिए': कोरोना पॉजिटिव मासूम की मां लगाती रही गुहार, अस्पताल के बाहर तोड़ा दम
विशाखापट्टनम, अप्रैल 28: देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार इतनी घातक है कि स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। अस्पतालों में बेड की भारी किल्लत है, इसके चलते कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दे रहे हैं। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में कोरोना संक्रमित डेढ़ साल की बच्ची की मंगलवार शाम अस्पताल में भर्ती के लिए लंबे इंतजार के बाद मौत हो गई। बच्चे की मां अस्पताल में बेड के लिए काफी कोशिश करती रही, लेकिन उसे अपने मासूम बच्चे के लिए बेड नहीं मिल पाया। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी।

विशाखापट्टनम के किंग जॉर्ज हॉस्पिटल के बाद एक एंबुलेंस में डेढ़ साल की सरिता को सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। मां ने अस्पताल वालों से बच्ची को भर्ती करने की कितनी गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल वालों ने बेड की कमी की वजह से बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया। बच्ची एंबुलेंस में हांफ रहा थी, उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। वीडियो में बच्ची के पिता वीरा बाबू को ambu-bag की मदद से ऑक्सीजन पंप करते हुए देखा जा सकता है।
मां ने गुहार लगाई, 'कृपया मेरी बच्ची को बचा लीजिए, अरे कोई तो मेरी बच्ची को बचा लो। उन्होंने उसे सड़क पर छोड़ दिया...क्या इसी सब के लिए आप लोग डॉक्टर बने हैं? मैं उसे बचाने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकी लेकिन उन्होंने उसे सड़क पर छोड़ दिया.... उन्होंने 104 नंबर डायल करने को कहा है लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं दे रहा।' करीब एक घंटे तक मां गिड़गिड़ाती रही, रोती रही, बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मिन्नतें करती रही, लेकिन अस्पताल वालों ने बेड की कमी के चलते मासूम को भर्ती नहीं किया।
बच्ची को शाम करीब 3:30 बजे भर्ती कर लिया गया था और इसके करीब एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर नाराजगी जताई और हंगामा किया। परिवारजनों का आरोप है कि, इस बच्ची की कुछ दिन पहले तबीयत खराब हुई थी और रैपिड टेस्ट में पहले उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन जब बुखार आता रहा तो एक निजी अस्पताल में दोबारा टेस्ट कराया गया जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई लेकिन अस्पताल ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया।












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