यूपीएससी: C-SAT पर निर्णय के खिलाफ जंतर मंतर पर हल्ला बोलेंगे छात्र

upsc c-sat issue
नई दिल्ली। जब श‍िक्षा की दीवारों पर आधुनिकता का पेंट किया जाए तो सहमति और असहमति नाम की दरारें अक्सर पड़ जाती हैं। यूपीएससी परीक्षा के सीसैट विवाद में गैर-अंग्रेजी भाषी छात्रों को छिटपुट राहत देने के बाद मोदी सरकार समस्या के स्थायी समाधान की कोशिश में जुट गई है।

क्यों नहीं बन पाई छात्रों में सहमति-

अंग्रेजी भाषा के सवालों के अंकों को नहीं जोड़कर सिर्फ 377.5 अंकों पर योग्यता सूची तैयार करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

छात्रों की मांग के एक हिस्से का ही निपटारा हो पाया है वह है अंग्रेजी को वरीयता न दी जाए। इसका लाभ कुछ विशेष छात्रों को मिलता है।

शायद सरकार व समाज में भ्रम है कि यह सिर्फ हिंदी भाषा के छात्रों की मांग है, जो गलत है। यह आंदोलन दक्षिण भारत में भी जोरशोर से जारी है।

अब क्या है आगे का कदम-

अब जल्द ही विशेषज्ञों की नई समिति का गठन किया जाएगा, जो अगले साल होने वाली परीक्षा के लिए सीसैट में किए जाने वाले बदलावों के बारे में सुझाव देगी। यह भी संभावना है कि अगले साल नए प्रारूप के साथ यूपीएससी की परीक्षा हो। प्रदर्शनकारी आज फिर सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर हंगामा कर सकते हैं।

ऊपर लिखे गए बिन्दुओं पर गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पुष्टि‍ करते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा के सवालों के अंकों को नहीं जोड़कर सिर्फ 377.5 अंकों पर योग्यता सूची तैयार करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। वे बोले कि अगले साल पूरे 400 अंकों की परीक्षा होगी, लेकिन उसमें अंग्रेजी भाषा के बजाय शायद दूसरे प्रकार के सवाल होंगे।

सीसैट प्रणाली लागू होने के बाद से ही छात्र इसमें हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते रहे थे। पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाते हुए सरकार को शिकायतों पर विचार करने का आदेश दिया था।

बना नया फॉर्मूला पर किसी काम का नहीं? क्या नहीं टाली जाएगी परीक्षा?

नए कंसेप्ट में मोदी सरकार ने वर्मा कमेटी की सिफारिश को खारिज करने का साफ संकेत दे दिया है। इस बीच यूपीएससी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा को टालने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। यह परीक्षा अपने पूर्व निर्धारित तिथि 24 अगस्त को ही होगी।

किस बात पर राजी होंगे छात्र-

C-SAT प्रणाली को खत्म करने की मांग को लेकर लगातार दो माह से प्रदर्शन करने वाले छात्रों का कहना है कि उन्होंने जो मांगा था वह नहीं मिला। बातचीत में सामने आया है कि छात्र ऐसा महसूस कर रहे हैं- जैसे जंजीर बदली और उन्हें लगा कि रिहाई हो गई हो।

क्या यहां भी है झोल-

छात्रों के एक समूह का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा की तिथि में बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में महीनों से प्रदर्शन में जुटे छात्र उत्तीर्ण कैसे होंगे। केवल वर्ष-2011 में पहली बार सीसैट के तहत परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को वर्ष-2015 में मौका देने की बात है, जबकि ऐसे छात्रों की संख्या कम है। अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार छात्रों को मनाने के लिए नई घुट्टी तैयार करने में जुट गई है।

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