पूर्वोत्तर में सबसे पुरानी पार्टी का बुरा हाल, इस चुनाव में सिर्फ इतनी सीट पर सिमटी
पूर्वोत्तर के चुनाव में सबसे पुरानी पार्टी का हुआ बुरा हाल। एनपीएफ नागालैंड में सिर्फ दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी जबकि पार्टी ने 2018 में सबसे अधिक 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी नागा पीपुल्स फ्रंट है, जिसे नागालैंड में बड़ा झटका लगा है। एनपीएफ नागालैंड में सिर्फ दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी जबकि पार्टी ने 2018 में सबसे अधिक 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एनपीएफ के अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ॰ शुरहोजेलि लियोजित्सु ने पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए विरोधी दलों के पैसों की ताकत को बताया है। नागालैंड चुनाव में जीत में पैसे ने बड़ी भूमिका निभाई है। हम दूसरे दलों से मुकाबला नहीं कर सकते हैं अगर पैसे का इस्तेमाल होगा। हमारी पार्टी नागा समाज की जड़ो में है और यह हमेशा यहां रहेगी।
नागा लोगों की सही पहचान का प्रतिनिधित्व हमारी पार्टी करती है, हम नागा लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की हमेशा से रक्षा करते आए हैं। हमारे मूल्य हमेशा हमारी मदद करेगे। डॉ॰ शुरहोजेलि लियोजित्सु ने कहा कि एनपीएफ नॉर्थईस्ट में सबसे पुरानी पार्टी है। पार्टी का गठन 1963 में हुआ था। एनपीएफ ने नागालैंड में 2003 से 15 साल शासन किया, हमने भाजपा और अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार चलाई। 2018 में स्थिति बदलने लगी जब नेफ्यू रियो ने पार्टी छोड़ी और भाजपा ने सीट बंटवारे की डील की और वह नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी में शामिल हो गए। एनपीएफ को दूसरा बड़ा झटका 2022 में लगा जब 21 विधायक एनडीपीपी में शामिल हो गए और नागालैंड को विपक्ष विहीन कर दिया।
एनपीएफ हालांकि भाजपा की अगुवाई वाली नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा है। पार्टी के पास मणिपुर में पांच विधायक हैं। बता दें कि पूर्वोत्तर के तीन राज्य में भाजपा सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने जा रही है। इसके अलावा असम सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर में भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार है। यानि अब पूर्वोत्तर में भाजपा की 7 राज्यो में सहयोगी दलों के साथ सरकार होगी। सिर्फ मिजोरम में एमएनएफ की सरकार है।












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