OI Defence: नेवी के लिए DRDO ने बनाई घातक मिसाइल, क्या है खासियत और कितने में बनी? जानें सब
OI Defence: भारत ने हाल ही में ओडिशा तट से लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल LR-AShM की सफल टेस्टिंग की है। यह मिसाइल DRDO द्वारा बनाई गई है, जिसकी रेंज 1,500 किलोमीटर तक अपने टारगेट को हिट करने की है। ये मिसाइल भारत के लिए क्यों जरूरी थी, कैसे काम करती है और क्या है इसकी खासियत सब जानेंगे।
क्या खास है इस मिसाइल में?
LR-AShM एक टू-स्टेप वाली, सॉलिड फ्यूल पर चलने वाली हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो मैक 5 से लेकर मैक 10 तक की स्पीड बहुत कम समय में हासिल कर सकती है। यह कम ऊंचाई पर उड़ते हुए, सेमी-बैलिस्टिक ट्रैक पर स्किप करती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते। इसमें इंडियन मेड सेंसर लगे हैं जो लास्ट स्टेप में चलते हुए टारगेट, जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, को भी सटीक ढंग से निशाना बना सकते हैं। इसकी टर्मिनल गाइडेंस और हाई-स्पीड मैन्युवरिंग (हवा में बार-बार घूमना या चक्कर खाना) इसे बेहद घातक बनाती है।

नेवी को इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ सामरिक तनाव ने भारत को अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए मजबूर किया। खासकर चीन की एयरक्राफ्ट कैरियर आधारित रणनीति को देखते हुए, भारत को ऐसी मिसाइल की जरूरत थी जो लंबी दूरी से दुश्मन के जहाजों को निशाना बना सके। LR-AShM इसी जरूरत का जवाब है, जो भारत की A2/AD (Anti-Access/Area Denial) क्षमता को मजबूत करती है, यानी दुश्मन को भारत के समुद्री क्षेत्र के करीब आने से रोकना।
कब और कैसे काम आएगी ये मिसाइल?
इस मिसाइल का उपयोग युद्ध के दौरान दुश्मन के बड़े युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और नौसैनिक ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाएगा। यह खास तौर पर उन परिस्थितियों में अहम होगी जब दुश्मन समुद्र के रास्ते भारत के करीब आने की कोशिश करेगा। इसकी लंबी रेंज और हाइपरसोनिक स्पीड भारत को स्टैंड-ऑफ अटैक की क्षमता देती है, यानी बिना पास गए ही दुश्मन को खत्म करना।
इसे बनाने में कितना खर्च आया?
LR-AShM प्रोजेक्ट की सटीक लागत सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है। हालांकि, डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि हाइपरसोनिक तकनीक के विकास में हजारों करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट होता है, क्योंकि इसमें एडवांस्ड मटेरियल, प्रोपल्शन और गाइडेंस सिस्टम शामिल होते हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिससे लंबे समय में लागत कम होती है।
चीन पाकिस्तान को कैसे करेगी काउंटर?
इस मिसाइल के आने से चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। चीन, जो हिंद महासागर में अपनी समुद्री ताकत बढ़ा रहा है, अब भारत की इस कैपेसिटी के कारण अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर होगा। साथ ही, वहीं पाकिस्तान के लिए भी यह एक मजबूत संदेश है कि भारत अब समुद्री युद्ध में भी हाई-टेक और तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। LR-AShM की हाइपरसोनिक स्पीड और रडार से बचने की क्षमता इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल बनाती है, जिससे यह कैरियर किलर जैसी भूमिका निभा सकती है।
मिसाइल नहीं डिफेंस स्ट्रेटजी में बदलाव
LR-AShM सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की डिफेंस स्ट्रेटजी में बदलाव का संकेत है। DRDO और भारतीय नौसेना की यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मिसाइल भारत को न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
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