ओडिशा: एंटीबायोटिक दवाओं के ओवर-द-काउंटर बिक्री पर होगा सख्त एक्शन, सरकार ने दिए निर्देश
ओडिशा सरकार ने बिना प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबॉयोटिक दवाओं की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने कहा है कि डॉक्टरों के लिए एंटीबायोटिक्स लिखते समय कारण बताना अनिवार्य है। ऐसे में दवा दुकानों और फार्मेसियों को चेतावनी दी है कि अगर वे बिना प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबायोटिक्स बेचते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
ओडिशा में अनुसूची H में एंटीबायोटिक्स सहित 551 दवाएं शामिल हैं। जबकि अनुसूची X में 16 दवाएं शामिल हैं। औषधि और प्रसाधन सामग्री नियमों के तहत, अनुसूची एच और अनुसूची एक्स के तहत निर्दिष्ट दवाओं को केवल पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के नुस्खे पर खुदरा रूप से बेचा जाना आवश्यक है। ओडिशा सरकार ने कहा है कि निर्देशों के उल्लंखन पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी और ड्रग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

वहीं राज्य औषधि नियंत्रक अशोक कुमार पात्रा ने एक बयान में कहा, "नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित दवा विक्रेता/केमिस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। कारण असंतोषजनक होने पर उन्हें व्यापार से रोका जा सकता है। औषधि निरीक्षकों को एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री की ईमानदारी से निगरानी करने के लिए कहा गया है।"
ओडिशा के स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. बिजय कुमार महापात्र ने कहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक प्रयोग लोगों की इम्युनिटी सिस्टम को भी कमजोर कर रहा है। प्रतिजैवक दवाओं के अधिक प्रयोग से अन्य दवाओं को प्रभाव कम हो रहा है।
उन्होंने कहा, "कोई भी दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेची जानी चाहिए। लेकिन केमिस्ट बिना प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबायोटिक्स दवाएं बेंचते हैं, जो कि चिंता का विषय है। अगर इसे रोका नहीं गया तो लोगों में रोगाणुरोधी प्रतिरोध बढ़ने के कारण गैर-संचारी और जूनोटिक रोग खतरा पैदा होगा। एंटी बॉयोटिक दवाओं को लिखते समय भी डॉक्टरों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। बिना बीमारियों को समझे इस तरह की दवाईयां लिखने से परहेज करना होगा।"












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