Prashant Kumar Raut: कौन है वो अफसर? जो 27 साल से बना 'दीमक'! 9 ठिकनों से 3 करोड़ कैश बरामद
तहसीलदार, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) और फिर अतिरिक्त डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात रहा। 27 साल सरकारी पदों पर कार्यरत रहा। दो बार रिश्वतखोरी के मामले में पकड़ा गया। गिरफ्तारी निलंबन भी हुआ। लेकिन, फिर से किस्मत ने जोर
एक लाख की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के 5 साल बाद ओडिशा के नवरंगपुर के अतिरिक्त डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुमार राउत एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। इस बार अफसर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में विजिलेंस की टीम की जांच में फंसे। जांच टीम ने अधिकारी के 9 ठिकानों पर छापेमारी कर करीब तीन करोड़ दो लाख की रकम बरामद की है। यह रकम अधिकारी के घर, ऑफिस, करीबियों और रिश्तेदारों के यहां छापेमारी के बाद जब्त की गई है। प्रशांत कुमार राउत को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
इतना ही नहीं, टीम ने राउत के पड़ोसी के घर से 500 रुपए की गड्डियों के छह बॉक्स बरामद किए हैं। इसे साथ ही विजिलेंस को एक गुमनाम इनोवा कार का भी जांच में अफसर के नाम मिली है। अब अफसर की मुश्किलें जल्द ही बढ़ सकती हैं। क्योंकि मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी एंट्री कर सकता है। संभव: मामले की जांच कर सकता है। तहसीलदार, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) और फिर अतिरिक्त डिप्टी कलेक्टर के पद पर रहे अफसर से आपको रूबरू करा रहे हैं...

कौन है रिश्वतखोर अफसर?
1996 में केंद्रपाड़ा में तहसीलदार के रूप में प्रशांत कुमार राउत नियुक्त हुए थे। इसके बाद जाजपुर, बालालेश्वर और बरगढ़ में तहसीलदार रहे। उसके बाद जाजपुर, कटक, केंद्रपाड़ा और सुंदरगढ़ में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) हुए। प्रशांत कुमार राउत की रिश्वत लेने की आदत ने उन्हें कानूनी शिकंजे में फंसा दिया। साल 2010 में विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
साल 2018 में भी सुंदरगढ़ के बिश्रा ब्लॉक में बीडीओ रहते हुए एक लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद नवरंगपुर में अतिरिक्त डिप्टी कलेक्टर के रूप में नियुक्त हुए। इस बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में अफसर फिर से विजिलेंस टीम के पंजे में फंस गए।
अफसर के इन ठिकानों पर छापेमारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशांत कुमार राउत के भुवनेश्वर के कानन विहार स्थित दो मंजिला मकान, नबरंगपुर में एक मकान, ऑफिस और भद्रक में अफसर के पैतृक गांव में छापेमारी की गई। सूत्रों के मुताबिक, करीब 9 ठिकानों पर छापेमारी हुई। दरअसल, आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी के दौरान तीन करोड़ की संपत्ति मिलने पर जांच टीम के होश उड गए।
नोट गिनने के लिए बुलानी पड़ी बैंक से मशीनें
वहीं, बरामद रकम को गिनने के लिए जांच टीम को बैंक से नोट काउंटिंग मशीन भी मंगानी पडी। जिसकी मदद से बरामद रकम को गिना गया। छापेमारी में कुल 3 करोड़ 2 लाख 30 हजार 800 रुपए की धनराशि बरामद हुई है।
ईडी के शिकंजे में अफसर!
संभावना है कि जल्द ही मामले में ईडी की एंट्री हो सकती है। ईडी मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच कर सकती है। साथ ही इस काले धन के सोर्स, बेनामी खाते में रकम, बेनामी अकाउंट की डिटेल संबंधी विषयों पर जांच कर सकती है।












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