Odisha: पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग की कांग्रेस में वापसी, रायगढ़ का बदलेगा राजनीतिक समीकरण
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग की कांग्रेस में वापसी के बाद राज्य में एक बार फिर से रायगढड में राजनीतिक समीकरण बदलने का दावा किया जा रहा है। दरअसल, ओडिशा में रायगढ़ वो क्षेत्र है जो कभी कांग्रेस का गढ़ था जो 2000 से बीजेडी के कब्जे में थी। लेकिन गुटबाजी के चलते बीजेडी के हाथ से पिछली बार इस क्षेत्र में सेंध लगी और यहां से निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई।

वहीं अब वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग की कांग्रेस पार्टी में वापसी के साथ रायगडा जिले में राजनीतिक परिदृश्य ने एक नया मोड़ ले लिया है। केबीके क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद, रायगढ़ में राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाता हैं, जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या उल्लेखनीय है। नई मतदाता सूची के अनुसार, जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में 3,72,474 महिला मतदाताओं सहित कुल 7,04,503 हैं।
वर्ष 2023 की नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, रायगढ़ में तीन बड़े उद्योग होने के बावजूद जिले में आर्थिक चुनौतियां हैं। हालांकि यहां सभी प्रमुख राजनीतिक दल नए उद्योगों की स्थापना का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन अब तक यहां ओद्योगिक क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ।
इस बीच बीजेडी आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है, जिससे पार्टी इकाई में बहु-गुटीय परिदृश्य बन रहा है। यह आंतरिक कलह उम्मीदवार चयन को प्रभावित कर सकता है, जिससे संभावित रूप से तीनों क्षेत्रों में नए चेहरों को फायदा होगा।
अनुभवी बीजद नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य एन भास्कर राव पिछले शहरी निकाय चुनाव तक जिला इकाई सुप्रीमो थे। हालाँकि, राव के कई कट्टर समर्थक उनसे अलग हो गए और जिला बीजद अध्यक्ष सुधीर दास के नेतृत्व में अपना समूह बना लिया। दूसरी ओर, जमीनी स्तर के बीजद कार्यकर्ता और कभी राव के करीबी सहयोगी रहे यल्ला कोंडा बाबू ने अपना अलग गुट बना लिया है।












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