Oath Ceremony: लोकसभा स्पीकर पद पर तकरार बरकरार, जानिए किसे मिल सकता है यह पद?
Oath Ceremony: एक बार फिर से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। ऐसे में नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में किन लोगों को जगह मिलेगी, इसको लेकर लगातार चर्चा चल रही है। कई दिग्गज नेताओं को नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में हिस्सा मिलने जा रहा है।
नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में राजनाथ सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीयूष गोयल, नितिन गडकरी, अश्विनी वैष्णव, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण जैसे नामों को तय माना जा रहा है।

ये नेता मंत्री पद की रेस में
जबकि कई ऐसे नाम भी हैं जो मंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। इसमे चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, एचडी कुमारस्वामी, सर्वानंद सोनोवाल, वीएल वर्मा, रवनीत बिट्टू रामनाथ ठाकुर, शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं।
लोकसभा स्पीकर पद की रेस
इस बीच हर किसी की नजर लोकसभा स्पीकर के पद पर बनी हुई है। स्पीकर का पद काफी अहम है, ऐसे में इस पद को लेकर कयासों का बाजार काफी गर्म है। रिपोर्ट की मानें तो स्पीकर पद के लिए टीडीपी और जदयू दोनों ने अपना दावा ठोका है। दोनों ही दल लोकसभा स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहते हैं।
स्पीकर पद के लिए टीडीपी नेता का नाम
माना जा रहा है कि टीडीपी अपनी पार्टी से सांसद केआर मोहन नायडू को स्पीकर बनाना चाहती है। इसकी बड़ी वजह है कि राम मोहन नायडू हिंदी, अंग्रेजी दोनों भाषा बोल सकते हैं।
हालांकि वह पहली बार चुनकर लोकसभा पहुंचे हैं। इसके अलावा गुंटूर से टीडीपी सांसद पी चंद्रशेखर का नाम भी सामने आ रहा है, वो भी टीडीपी की ओर से लोकसभा स्पीकर पद की रेस में हैं।
काफी अहम है स्पीकर का पद
लोकसभा स्पीकर का पद काफी अहम होता है। 1999 में भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में टीडीपी शामिल हुई थी और स्पीकर का पद मांगा था। जिसके बाद जीएमसी बालयोगी को स्पीकर बनाया गया था, वह पहली बार लोकसभा सांसद बने थे। बालोयगी ने गिरधर गमांग को वोट डालने की अनुमति दी थी, जिसके बाद वाजपेयी सरकार गिर गई थी। गिरधर कांग्रेस सांसद थे।
गमांग ओडिशा के मुख्यमंत्री बन गए थे, लेकिन उन्होंने लोकसभा स्पीकर पद से इस्तीफा नहीं दिया था, बावजूद इसके विवेक के आधार पर उन्हें वोट देने की अनुमति दी गई। ऐसे ही कई अहम मसलों में स्पीकर की भूमिका काफी अहम होती है। जिसकी वजह से टीडीपी स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहती है।
ओम बिड़ला ने रचा है इतिहास
पिछली लोकसभा में भाजपा सांसद ओम बिड़ला ने स्पीकर का पद संभाला था। उन्होंने एक बार फिर से राजस्थान के कोटा सीट से 4 लाख से अधिक वोट से चुनाव जीता है। 1999 के बाद से कोई भी ऐसा लोकसभा स्पीकर नहीं है जो लगातार दूसरी बार चुनाव जीता हो। लेकिन ओम बिड़ला तीसरी बार चुनाव जीतकर आ रहे हैं।
इससे पहले 1999 में टीडीपी नेता जीएमसी बालयोगी लोकसभा स्पीकर बने थे। 3 मार्च 2002 को हेलीकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया था। जिसके बाद मनोहर जोशी स्पीकर बने थे। हालांकि मनोहर जोशी 2004 में चुनाव हार गए थे।
2004 में सोमनाथ चटर्जी स्पीकर बने थे। लेकिन 2009 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया था। 2009 में मीरा कुमार स्पीकर बनीं, लेकिन 2014 में वह चुनाव हार गईं और संसद नहीं पहुंच सकीं।
इसके बाद सुमित्रा महाजन स्पीकर बनीं। इंदौर लोकसभा सीट से लगातार 8 बार उन्होंने चुनाव जीता, लेकिन 2019 में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया।












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