कैग मांगे ममता से 250 करोड़ रुपयों का हिसाब
कोलकाता। पश्चिम बंगाल का सारधा घोटाले से जुड़े विवाद और इससे जुड़ी खबरों के आने का सिलसिला अभी तक रूका नहीं है। अब ताजा खबरों में इस घोटाले के सिलसिले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुसीबतें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। कैग को ममता से उन 250 करोड़ रुपयों का हिसाब चाहिए जिसे ममता की सरकार ने सारधा शील्ड स्कीम की आड़ में लोगों के बीच बांटा गया था।

क्या थी स्कीम
सारधा घोटाले का पता लगने के बाद ममता बनर्जी की सरकार ने हर गरीब वितरक को सारधा शील्ड स्कीम के तहत मुआवजा देने का फैसला किया था जिसे इस घोटाले की वजह से खासा नुकसान हुआ था। इस स्कीम के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने करीब 250 करोड़ रुपए लोगों के बीच में बांटे थे।
ममता से कैग के सवाल
- कैग को ममता से इस स्कीम के बारे में जानकारी चाहिए।
- कैग जानना चाहता है कि जो पैसा वितरकों में बांटा गया क्या वह टैक्स पेयर्स का पैसा था।
- कैग इस स्कीम से जुड़ी नीतियों के फैसलों के बारे में भी ममता से जानकारी मांगी है।
- कैग ने इस स्कीम के जरिए फायदा हासिल करने वाले लोगों के नाम भी ममता से जानने की कोशिश की है।
- पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग के पास कैग की ओर से आई चिट्टी है।
- विभाग के लिए कैग के इस सवाल का जवाब देना काफी जरूरी है कि सरकार ने किस तरह से इससे जुड़े फैसले लिए।
कैग का नोटिस, सरकार की मुसीबत
कैग की ओर से आए नोटिस का जवाब देने में पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग के सामने जो सबसे बड़ी मुसीबत है वह है इस बात का जवाब देना कि सरकार ने जनता के पैसे का प्रयोग कैसे जमाकर्ता का पैसा लौटाने में किया।
सारधा एक निजी फर्म थी और इस फर्म में इतना बड़ा घोटाला अपने आप में हैरान करने वाला है। कैग के नोटिस में सरकार से सवाल किया गया है कि क्या यह सरकार का दायित्व था कि वह टैक्स पेयर्स के पैसे से मुआवजा अदा किया जबकि एक प्राइवेट फर्म ने एक अच्छी खासी रकम बेइमानी से हड़प ली थी।
अधिकारियों ने की थी रोकने की कोशिश
जब सरकार की ओर से इस स्कीम का फैसला लिया गया था तो राज्य के वित्त विभाग के सदस्यों ने सरकार को बताया था कि नियमों के तहत इस तरह की स्कीम को शुरू करने की कोई भी मंजूरी नहीं है। अधिकारियों ने कोशिश की थी कि सरकार अपने फैसले पर दोबारा सोचे।
सरकार ने जस्टिस श्यामलाल कमीशन को बनाकर इस पूरे मुद्दे को उसके हवाले कर दिया। इसके बाद राज्य कैबिनेट की ओर से फैसला लिया गया कि लोगों को मुआवजा देने के लिए वह इस स्कीम को आगे बढ़ाएगी।
कैग के अलावा लोगों की ओर से भी कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर क्यों सरकार ने इतनी जल्दी में फैसला ले लिया कि वह लोगों को मुआवजा देगी। आरोप तक यहां तक है कि टीएमसी के कई सदस्य सारधा ग्रुप के काफी करीबी थे और वे इस बात को महसूस करते थे कि टैक्स पेयर्स की रकम से दिया गया मुआवजा घोटाले की आग को और भड़का सकता है।
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