अब जुगाड़ करके टीचर अहम पुरस्कार नहीं ले पाएंगे
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)अब जुगाड़ से मास्टर जी राष्ट्रीय और राजकीय पुरस्कार नहीं ले पाएंगे। अब उन्हीं शिक्षकों को उक्त पुरस्कार मिलेंगे जिनकी कक्षाओं या स्कूल के बच्चों का रिजल्ट बेहतर होगा।

निर्देश दिए
मानव संसाधन विभाग ने सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को इस बाबत निर्देश दिए हैं। जानकारों का कहना गै कि अभी तक उन्हीं शिक्षकों को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार मिलते हैं,जिनके अफसरों से जुगाड़ रहता है। ईमारदारों को कोई नहीं पूछता।
बिहार में पहल
इस बीच, बिहार में केन्द्र की सलाह पर पहल भी शुरू हो गई है। वहां हर जिले से दो-दो शिक्षकों के नामों की अनुशंसा करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए 28 फरवरी की तिथि तय की है।
शिक्षिकाओं का चयन
शिक्षा विभाग ने कहा है कि इसके लिए सरकारी विद्यालयों के साथ केन्द्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का भी चयन किया जाये। जानकारी के अनुसार, हर जिले को जिला शिक्षा पदाधिकारी की अनुशंसा में गठित समिति से अनुमोदन कराना आवश्यक होगा। इस समिति में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), प्रारंभिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय के एक प्राचार्य तथा माध्यमिक विद्यालय के एक प्राचार्य को सदस्य के रूप में रखा गया है। प्रधान सचिव ने साफ किया है कि स्वच्छ और दोष रहित शिक्षकों को इसमें प्राथमिकता दी जानी है।
शिक्षक दिवस
मालूम हो कि पांच सितम्बर को प्रतिवर्ष राज्य सरकार के स्तर पर शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया जाता है। उक्त समारोह में राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों को राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। राज्य पुरस्कार की अनुशंसा के क्रम में महिला शिक्षकों की भागीदारी 50 प्रतिशत सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। राज्य पुरस्कार के लिए नियोजित शिक्षक भी योग्य होंगे।
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शिक्षक व शिक्षिकाओं की योग्यता उपलब्ध रहने पर अनुशंसा करने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। ये भी निर्देश दिए गए हैं कि पुरस्कार चयन के लिए किसी भी शिक्षक से न तो आवेदन पत्र प्राप्त किया जाये और न चयन उनसे प्राप्त अभ्यावेदन के आधार पर किया जाये।
गड़बड़ होती है
राजधानी के एक सरकारी स्कूल की कैमेस्ट्री की टीचर ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि सरकार का यह फैसला बेहद अहम है। दरअसल शिक्षकों को देश और राज्य स्तर पर दिए जाने वाले पुरस्कारों में खूब गड़बड़ होती है।












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