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अब देश में ड्रोन से वैक्सीन और मेडिसिन पहुंचाने की तैयारी, ये राज्य सबसे आगे

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नई दिल्ली, 13 जून: कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में लगातार नई-नई पहल हो रही है। इसी कड़ी में अब देश में ड्रोन के इस्तेमाल की भी तैयारी शुरू हो चुकी है। दो महीने पहले ही केंद्र सरकार की ओर से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को इस दिशा में संभावनाएं तलाशने की अनुमति मिली थी। कोशिश ये है कि ड्रोन के जरिए उन इलाकों में जल्दी से जल्दी वैक्सीन और मेडिसिन पहुंचाई जाए, जहां दूसरे माध्यम से जाने में ज्यादा देर हो सकती है। तेलंगाना ऐसा पहला राज्य है, जिसने एक ई-कॉमर्स कंपनी से इसके लिए करार भी कर लिया है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू होने वाला है।

ड्रोन से वैक्सीन और दवाइयां पहुंचाने की तैयारी

ड्रोन से वैक्सीन और दवाइयां पहुंचाने की तैयारी

देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले लोगों तक जल्द ही ड्रोन की मदद से कोविड-19 वैक्सीन पहुंचाई जा सकती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ईसीएमआर) की ओर से शुक्रवार को एचएलएल इंफ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड ने भारत के कुछ चुनिंदा स्थानों तक अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) के जरिए मेडिकल सप्लाई, जैसे कि वैक्सीन और दवाइयों की डिलिवरी के इच्छुक ऑपरेटरों से एक्प्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगा है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि आईसीएमआर इसके लिए पहले से तय फ्लाइट पाथ पर कोविड-19 वैक्सीन की डिलिवरी के लिए यूएवी ऑपरेटरों की सेवाएं लेगा। इसने इच्छुक पार्टियों से आवेदन के लिए एक खाका भी तैयार किया है।

35 किलो मीटर से ज्यादा दूरी तय करेंगे ये ड्रोन

35 किलो मीटर से ज्यादा दूरी तय करेंगे ये ड्रोन

आईसीएमआर को किस तरह के ड्रोन की आवश्यकता है, इसकी की भी जानकारी दी गई है। कंपनी के मुताबिक ड्रोन ऐसे होने चाहिए जो कम से कम 100 मीटर की ऊंचाई तक न्यूनतम 35 किलोमीटर की हवाई दूरी तय कर सकें। यह ऐसे यूएवी होंगे जो खड़ी उड़ान भरने में सक्षम होंगे और कम से कम 4 किलो ग्राम पेलोड लेकर चल सकेंगे। इनमें निर्धारित स्थान तक सामान पहुंचाकर अपने होम बेस लौट आने की भी क्षमता होनी चाहिए। एचएलएल की ओर से साफ किया गया है कि पैराशूट आधारित डिलिवरी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यह भी साफ कर दिया गया है कि यूएवी ऑपरेटरों से यह प्रस्तावित करार 90 दिनों तक मान्य रहेगा और परफॉर्मेंस और प्रोग्राम की जरूरतों के मुताबिक इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

तेलंगाना सरकार और फ्लिपकार्ट में करार

तेलंगाना सरकार और फ्लिपकार्ट में करार

बता दें कि करीब दो महीने पहले मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने आईसीएमआर को शर्तों के आधार पर कोविड-19 वैक्सीन की ड्रोन से डिलिवरी के लिए संभावनाओं की तलाश की अनुमति दी थी। इस प्रोजेक्ट के लिए आईसीएमआर ने आईआईटी-कानपुर के साथ साझेदारी की है। आईसीएमआर को यह छूट एक साल तक के लिए या अगले आदेश तक के लिए दी गई है। इस बीच ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने शुक्रवार को कहा कि उसने सुदूर इलाकों तक ड्रोन से कोविड-19 वैक्सीन और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए तेलंगाना सरकार के साथ साझेदारी की है।

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पहले पायलट प्रोजेक्ट पर होगा काम

पहले पायलट प्रोजेक्ट पर होगा काम

वैसे तेलंगाना में 'मेडिसिन फ्रॉम दि स्काई' प्रोजेक्ट लॉन्च करने से पहले 6 दिनों के लिए इसपर पायलट प्रोजेक्ट चलाने की योजना है। तेलंगाना सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (आईटी और आई एंड सी) जयेश रंजन ने कहा है, 'दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी आपूर्ति देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करना अपने देश में अब तक की एक अनूठी पहल है और हम फ्लिपकार्ट जैसे साझीदारों के सहयोग से इस पहल की अगुवाई करके खुश हैं।' (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

English summary
Drone delivery of vaccines and medicines will start in India, Telangana ties up with Flipkart
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