अब पक्ष भी मोदी और विपक्ष भी मोदी, कांग्रेस की ताकत शून्य

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नयी दिल्ली। 16वीं लोकसभा चुनाव अपने आप में अनोखा चुनाव साबित‍ होगा। इस चुनाव में जहां कई इतिहास लिखे गए वहीं कई नई चीजें घट रही हैं। इस बार लोकसभा में विपक्ष का नेता नहीं होगा। इस आशंका पर मुहर लग गई है।

दरअसल संसद के नियम के अनुसार विपक्ष को लोकसभा सीटों का दस प्रतिशत यानी कि 55 सीटे चाहिए, लेकिन कोई भी पार्टी इस आंकड़े को नहीं छू पाई है। देश की दो बड़ी पार्ट‍ियों में शामिल कांग्रेस अब ऐसे हालात में आ खड़ी हुई है, कि उसके पास विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए भी उपयुक्त् सांसद नहीं हैं।

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ऐसे में लोकसभा में कोई भी विपक्ष का नेता नहीं बन सकता। इस बार लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं वहीं जय ललिता की अन्नाद्रुमक पार्टी को 37 सीटें। कांग्रेस की बात करें तो उसका यह सबसे खराब प्रदर्शन है।

लोकसभा या राज्यसभा में विपक्ष के नेता को कैबिनेट रैंक के मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है और उसे उनके समान वेतन एवं भत्ते मिलते हैं। सत्ता में आई पार्टी के अलावा जो भी कोई बड़ी पार्टी जिसके पास ज्यादा सीटें होती है उसे ये पद दिया जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी भले ही न हों पर सदन-सदन मोदी जरूर हो गया है।

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