ना दिया लेखा-जोखा तो पड़ जाएंगे लेने के देने

आयोग ने पिछले चुनाव में लेखाजोखा न देने वालों के खिलाफ भी सख्य रवैया अख्तियार किया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुबर्द्धन ने स्पष्ट किया है कि गत चुनावों में जिन प्रत्याशियों ने खर्च का लेखाजोखा नहीं दिया है, उन्हें दो जून तक हर हाल में इसका ब्योरा देना होगा। ऐसा न करने वालों को चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देशों में नाम निर्देशन पत्रों का मूल्य, जमानत की धनराशि और प्रत्याशियों के अधिकतम व्यय की सीमा तय कर दी है। इसके तहत ग्राम पंचायत सदस्य पद पर लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी को नामांकन फार्म 50 रुपये, प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए 100 रुपये और जिला पंचायत सदस्यों के लिए यह सीमा 150 रुपये रखी गई है।
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व महिलाओं के लिए यह कीमत आधी रहेगी। ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए जमानत राशि 100 रुपये, प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 500 रुपये और जिला पंचायत सदस्य के लिए जमानत राशि एक हजार रुपये रखी गई है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व महिलाओं के लिए यह जमानत राशि आधी रहेगी।
चुनावी खर्च की सीमा सभी के लिए समान रखी गई है। ग्राम पंचायत सदस्य के लिए यह सीमा पांच हजार रुपये, प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए खर्च की सीमा 25 हजार रुपए व जिला पंचायत सदस्यों के लिए यह सीमा 70 हजार रुपये रखी गई है। अप्रत्यक्ष निर्वाचन के प्रत्याशियों के लिए व्यय की सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत उप प्रधान के लिए यह राशि 7500 रुपये, कनिष्ठ उप प्रमुख के लिए 25 हजार, ज्येष्ठ उप प्रमुख के लिए 30 हजार,
प्रमुख क्षेत्र पंचायत के लिए 70 हजार, उपाध्यक्ष जिला पंचायत के लिए 1.25 लाख और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए खर्च की अधिकतम सीमा 1.75 लाख रुपये रखी गई है। उन्होंने बताया कि डीएम और एसएसपी तात्कालिक परिस्थिति के हिसाब से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों को चिह्नित करेंगे।












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