जानिए क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेशी अवैध नागरिकों और असम की हालत पर

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अभी तक मोदी के बयान को लेकर देश में उनकी आलोचना हो रही थी लेकिन अब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी उनके इस बयान पर चिंता जाहिर की है। शेख हसीना की मानें तो नरेंद्र मोदी का यह बयान अनावश्यक और अवांछित बयान था।
शेख हसीना के मुताबिक इस तरह के बयानों की वजह से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ेगा और भविष्य में जो सरकार बनेगी उसके साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं। शेख हसीना ने यह बात पीएमओ में ढाका से फोन करके कही है। शुक्रवार को इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर में इस बात की जानकारी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
शेख हसीना की चिंता और बाकी पार्टियों की आलोचना से अलग सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2005 में देश में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलीगल माइग्रेंट्स(डिटरमिनेशन बाय ट्रिब्यूनल) एक्ट यानी आईएमडीटी को खत्म कर एक फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने असम में रहने वाले अवैध प्रवासियों पर तैयार सिन्हा रिपोर्ट पर खासी चिंता जाहिर की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश से असम में बड़े पैमाने पर आने वाले लोगों की वजह से इस राज्य में एक आक्रामक स्थिति बन गई है।
दिन पर दिन खराब होते हालात
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि बांग्लादेश से आने वाले लोगों ने असम में रहने वाले लोगों की जिंदगी को पूरी तरह से असुरक्षित बना डाला है। बांग्लादेश से आने वाले लोगों की वजह से यहां के लोगों में काफी गुस्से के हालात हैं और नॉर्थ-र्इस्ट के बाकी राज्यों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
रोजाना 6,000 बांग्लादेशी
वर्ष 2005 में असम के राज्यपाल ने केंद्र सरकार के साथ जो आंकड़े साझा किए थे उनके मुताबिक रोजाना 6,000 से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक असम में दाखिल होते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक भारत में इस समय 10 लाख अवैध बांग्लादेशी नागरिक रहे हैं। अकेले असम में करीब पांच मिलियन अवैध प्रवासी हैं। असम की जनसंख्या में वर्ष 2001 के मुकाबले 2011 में 16 प्रतिशत से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है और सबसे ज्यादा असर यहां के ढुबरी जिले में देखने को मिला है।
खास बात है कि असम की जनसंख्या में होने वाला यह इजाफा वहां की जनसंख्या की वजह से नहीं बल्कि दूसरे देश यानी बांग्लादेश से आकर बसे नागरिकों की वजह से हुआ है।
वोट बैंक पॉलिसी से चौपट होता असम
ममता बनर्जी हों या फिर कोई और लेकिन यह बात सच है कि असम में वोट बैंक की पॉलिसी ने यहां के हालातों को और गंभीर बना दिया है। अवैध प्रवासियों की वजह से यहां के हालात काफी हिंसक हो गए हैं। असम में बोडो और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच होने वाली हिंसा यहां के हालातों को बद से बदतर करती जा रही है।












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