बिहार: 30 साल बाद आई 'सुशासन' में बिजली, अब 24 घंटे रौशन रहता है इलाका

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पटना। एसोचैम में भले ही बिहार की बीमारू छवि के उलट रिपोर्ट आई हो पर यहां एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजनीति और राजनेताओं की नीयत पर गहरे संवदेनात्मक सवाल दाग दिए हैं। रिपोर्ट की शुरुआत से पहले हम बता दें कि यह खबर पटना से बीबीसी संवाद्दाता मनीष शांडिल्य की औचकता से सामने आई है।

राजधानी पटना से सिर्फ़ 80 किलोमीटर दूर और सड़क और रेलवे लाइन से जुड़े होने के बावजूद जहानाबाद ज़िले की धरनई पंचायत में 30 साल से बत्ती ही नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्रीन पीस की पहल से कुछ महीने पहले यह इलाक़ा रोशन हुआ। दिलचस्प यह रहा कि सौर्य ऊर्जा ने इस क्षेत्र का कायापलट कर दिया।

संस्था यहां सौर ऊर्जा चालित माइक्रोग्रिड से 100 किलोवाट बिजली पैदा कर रही है। अक्षय ऊर्जा प्रमुख रमापति कुमार का दावा है कि माइक्रोग्रिड के ज़रिए भारत में 24 घंटे बिजली देने का यह पहला सफल प्रयास है जो कि अन्य क्षेत्रों में भी दोहराने की येाजना है।

सम्बंध‍ित संवाद्दाता को ग्रीन पीस के रमापति ने बताया, ''बिजली के सहारे महिलाओं में सुरक्षा बोध बढ़ा है और बच्चों को पढ़ने में आसानी हो रही है और यह बदलाव उन्हें सबसे ज़्यादा सुकून पहुंचाते हैं।' इसी के साथ इस पहल को भी पंख लगने की उम्मीद है जिसमें देशभर में चौबीस घंटे बिजली देने का वादा किया गया है।

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