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मनमोहन सिंह ही नहीं, देश के ये सात Prime Minister भी थे 'एक्सीडेंटल', देखिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की किताब पर बनी फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टिर' (The Accidental Prime Minister) पर सियासत गरमा गई है। फिल्म का ट्रेलर सामने आने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चर्चा में आ गए हैं। ऐसा कहा जा रहा कि मनमोहन सिंह को जिस समय प्रधानमंत्री पद दिया गया, उस समय उन्हें इस पद का स्वाभाविक दावेदार नहीं माना जा रहा था। मनमोहन सिंह 'एक्सीडेंटल पीएम' बने थे यानी संयोग से उन्हें ये पद मिला था। हालांकि मनमोहन सिंह अकेले ऐसे नहीं हैं जो 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' बनाए गए। संसदीय इतिहास में कई और नाम ऐसे हैं जिन्हें अचानक ही पीएम के पद पर पहुंचने का मौका मिला। 'एक्सीडेंटल पीएम' की इस लिस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का भी नाम शामिल है। आइये जानते हैं कौन-कौन बना 'एक्सिडेंटल पीएम'...

मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह

संजय बारू के उपन्यास पर बनी फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' से फिर चर्चा में आए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बात करें तो उनके बारे में भी कहा जाता है कि 2004 में जिस समय उन्हें पीएम बनाया गया था उस समय उनका नाम इस रेस में नहीं था। 2004 में लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की करारी हार हुई। देश की जनता ने कांग्रेस पर अपना भरोसा जताया। कांग्रेस गठबंधन ने वाम दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि इस बीच सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। ऐसे में तत्कालीन कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह का नाम सामने आया। मनमोहन सिंह ने 22 मई, 2004 को पहली बार प्रधानमंत्री बनें और इसके दूसरे टर्म के लिए भी चुने गए और 26 मई, 2014 तक यानी पूरे दस साल प्रधानमंत्री रहे।

इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी

'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' की बात करें तो इंदिरा गांधी का नाम इस लिस्ट में सबसे पहले माना जा सकता है। दरअसल 1966 में इंदिरा गांधी को उस समय प्रधानमंत्री बनाया गया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में अचानक ही निधन हो गया था। 11 जनवरी, 1966 में ताशकंद में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का निधन हुआ, जिसके बाद गुलजारी लाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए थे। हालांकि इसी दौरान इंदिरा गांधी का नाम पीएम पद के लिए आगे बढ़ाया गया। लाल बहादुर शास्त्री मंत्रिमंडल में इंदिरा गांधी सूचना प्रसारण मंत्री थी। आखिरकार पीएम के तौर इंदिरा गांधी के नाम पर मुहर लगी, इस तरह 24 जनवरी, 1966 को इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री बनीं।

चौधरी चरण सिंह

चौधरी चरण सिंह

इतिहास पर गौर करें तो 'एक्सीडेंटल पीएम' की लिस्ट में दूसरा चौधरी चरण सिंह का आता है। दरअसल आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। उस समय पहली बार देश में गैर-कांग्रेसी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई। जनता पार्टी की इस सरकार में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री चुने गए, चरण सिंह उप-प्रधानमंत्री बनाए गए। हालांकि जल्दी ही जनता पार्टी में घमासान शुरू हो गया और मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। इसके बाद 28 जुलाई, 1979 को अचानक ही चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने। उनकी सरकार कांग्रेस के समर्थन से बनी थी, हालांकि बहुमत परीक्षण के लिए 20 अगस्त, 1979 तक का समय दिया गया था। इससे पहले ही कांग्रेस पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया। इस तरह से चरण सिंह को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।

राजीव गांधी

राजीव गांधी

राजीव गांधी भी 'एक्सीडेंटल पीएम' बने थे। 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अचानक ही उनके बॉडीगार्ड्स ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद देश में नेतृत्व का संकट आ खड़ा हुआ। ऐसी परिस्थिति में इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई और उन्हें प्रधानमंत्री चुना गया। वह देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी के बारे में बताया जाता है कि उनकी राजनीति में आने की योजना नहीं थी। हालांकि बदले हालात के चलते उनकी राजनीति में एंट्री हुई। इससे पहले 1980 में उनके भाई संजय गांधी की हवाई जहाज दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मां इंदिरा गांधी का सहयोग देने के लिए उन्होंने राजनीति में एंट्री की। राजीव गांधी लोकसभा सांसद बने। वो 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

चंद्रशेखर

चंद्रशेखर

1990 में समाजवादी जनता पार्टी के नेता चंद्रशेखर भी 'एक्सीडेंटल पीएम' बने थे। हुआ ये कि 1990 में तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से बीजेपी ने अपना समर्थन इसलिए वापस ले लिया था क्योंकि लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय नेतृत्व परिवर्तन कर सरकार बचाने का भी विकल्प मौजूद था लेकिन उसके लिए वीपी सिंह इसके लिए तैयार नहीं थे। उस समय राजीव गांधी ने चंद्रशेखर से संपर्क किया। चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता दल में टूट हो गई। उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार का गठन किया और 10 नवंबर, 1990 में देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि वो महज 6 महीने इस पद पर रहे। 21 जून, 1991 को चंद्रशेखर को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।

पीवी नरसिंह राव

पीवी नरसिंह राव

पीएम पद के तौर पर पीवी नरसिंह राव का चयन भी एक्सीडेंटल ही था। 21 जून, 1991 को चंद्रशेखर ने पीएम पद से इस्तीफा दिया जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई। कृषि विशेषज्ञ से राजनीति में आए पीवी नरसिंह राव को अचानक ही प्रधानमंत्री चुना गया। नरसिंह राव 16 मई 1996 तक ही रहे।

एचडी देवगौड़ा

एचडी देवगौड़ा

1 जून, 1996 में एचडी देवगौड़ा पीएम बनें। जनता दल सेक्युलर के नेता एचडी देवगौड़ा का पीएम बनना भी बेहद चौंकाने वाला और 'एक्सीडेंटल' था। देवगौड़ा के नेतृत्व में बनी सरकार को कांग्रेस पार्टी बाहर से समर्थन कर रही थी। हालांकि महज 10 महीने में ही उनकी सरकार गिर गई। 21 अप्रैल, 1997 को देवगौड़ा को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। जब उन्हें पीएम बनाया गया उस समय यूनाइटेड फ्रंट सरकार की पहली तीन पसंद में उनका शामिल नहीं था। देवगौड़ा कर्नाटक में कुछ दिन पहले चुनाव जीत कर सीएम पद संभाल रहे थे। हालांकि बदले राजनीति परिदृश्य में देवगौड़ा का नाम आगे बढ़ाया गया और वो पीएम बन गए।

इंद्र कुमार गुजराल

इंद्र कुमार गुजराल

1997 में एचडी देवगौड़ा सरकार से कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद हालात बदल गए। इस दौरान लोकसभा चुनाव टालने के लिए कांग्रेस और संयुक्त मोर्चा के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत इंद्र कुमार गुजराल को संयुक्त मोर्चा का नेता चुना गया। 21 अप्रैल, 1997 में उन्होंने 12वें प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि नवंबर, 1997 में ही कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापस ले लिया और 28 नवंबर, 1997 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद करीब 3 महीने वो केयरटेकर प्रधानमंत्री रहे। बताया जा रहा है कि उनका नाम भी पीएम पद की रेस में नहीं था लेकिन अचानक ही उनके नाम पर मुहर लगी।

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