NOIDA Twin Tower गिराने से आसपास कितना असर हुआ ? CEO ऋतु माहेश्वरी ने बताए नुकसान

NOIDA का सुपरटेक ट्विन टावर गिरा दिया गया है। 9 सेकेंड में जमींदोज हुई गगनचुंबी इमारतों के मलबे से आस-पास के इलाके में नुकसान की सूचना है। noida twin towers supertech buildings damage nearby area ritu maheshwari

नोएडा (UP), 28 अगस्त : नौ साल की लंबी लड़ाई के बाद उत्तर प्रदेश के NOIDA में बनी बहुमंजिला इमारतों को आज ढहा दिया गया। कंट्रोल्ड ब्लास्ट की मदद के गिराए गए नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स से आसपास नुकसान भी हुआ है। नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु माहेश्वरी ने बताया, ट्विन टावर्स के मलबे की चपेट में आने से पास की सोसायटी की 10 मीटर की चारदीवारी, एटीएस क्षतिग्रस्त हो गई है।

300 सफाई कर्मचारी तैनात

300 सफाई कर्मचारी तैनात

बकौल सीईओ ऋतु माहेश्वरी, अन्य कहीं से नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है कि यह प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा, विध्वंस से पहले और बाद में AQI डेटा लगभग समान है। शाम 7 बजे के आसपास, आसपास के खाली सोसाइटियों के निवासियों को अपने घरों में वापस जाने की अनुमति दी जाएगी। यहां लगभग 100 पानी के टैंकर और 300 सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

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    Noida Twin Tower Demolition: ट्विन टावर्स का मालिक कौन, क्यों गिराई गई बिल्डिंग ? | *News
    वायु प्रदूषण पर नजर रख रहे

    वायु प्रदूषण पर नजर रख रहे

    नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु माहेश्वरी ने बताया, Supertech Twin Towers का नियोजित विध्वंस दोपहर 2:30 बजे सफलतापूर्वक किया गया। सफाई का काम शुरू हो गया है। जल्द ही आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। वायु प्रदूषण के बारे में CEO ने कहा, AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) की निगरानी की जा रही है और हम थोड़ी देर में डेटा जारी करेंगे।

    कुतुब मीनार से भी ऊंचा, गिराने का खर्च करीब 18 करोड़

    कुतुब मीनार से भी ऊंचा, गिराने का खर्च करीब 18 करोड़

    गौरतलब है कि करीब 17.55 करोड़ रुपये की लागत से गिराई गई सुपरटेक बिल्डिंग- नोएडा ट्विन टावर के कंट्रोल्ड डिमॉलिशन में 3700 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों इमारतों को गिराने का फैसला लिया गया। दिलचस्प है कि ट्विन टावर में एक को एपेक्स (32 मंजिल) और दूसरे को सेयेन (29 मंजिल) नाम दिया गया था। इमारतों की ऊंचाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 100 मीटर ऊंची इमारत कुतुब मीनार से भी ऊंची थी।

    तीन महीने में साफ होगा मलबा

    तीन महीने में साफ होगा मलबा

    ट्विन टावर ध्वस्त होने के बाद मलबा इतनी मात्रा में जमा हुआ है कि इसे साफ करने में करीब तीन महीने लगेंगे। सेक्टर 93ए के पास बनी सुपरटेक ट्विन टावर बिल्डिंग के आप पास वाले अस्पतालों ने एहतियाती कदम उठाते हुए जरूरत पड़ने पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने को कहा गया।

    ट्विन टावर डिमॉलिशन से पॉल्यूशन पर डॉक्टरों की राय

    ट्विन टावर डिमॉलिशन से पॉल्यूशन पर डॉक्टरों की राय

    NOIDA Twin Towers गिराने और इससे सेहत पर असर को लेकर डॉक्टरों का मानना है विस्फोट के बाद बिल्डिंग का मलबा गिरेगा, जिसके कारण स्थानीय निवासियों की सेहक पर धूल का प्रभाव न्यूनतम होगा। सरकार का भी कहना है कि विध्वंस नियंत्रित तरीके से हुआ। देखरेख करने वाले विशेषज्ञों ने प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। फोर्टिस नोएडा के प्रमुख पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर डॉ मृणाल सरकार ने कहा, "जब आप इस तरह की एक बड़ी संरचना को ध्वस्त करते हैं, तो धूल होगी और कुछ धुआं होगा क्योंकि आप विस्फोटकों का उपयोग कर रहे हैं। इसलिए, हवा की दिशा मायने रखती है। हवा की दिशा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, खुली हवा में होने वाला विस्फोट भूमिगत खदानों की तुलना में अधिक सुरक्षित है। डॉ सरकार ने आश्वस्त किया कि "धूल और गैसें हवा में घुल जाएंगी और बिखर जाएंगी। इतने बड़े विध्वंस में शामिल विशेषज्ञ इन सभी चीजों का ध्यान रखेंगे।"

    40 फ्लोर का प्लान

    40 फ्लोर का प्लान

    सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को गिराने की मंजूरी देते हुए 21 अगस्त का समय निर्धारित किया था, लेकिन नोएडा प्राधिकरण के अनुरोध पर इसे 28 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था। 2004 में न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (NOIDA) द्वारा एक हाउसिंग सोसाइटी के विकास के लिए सुपरटेक लिमिटेड को एक प्लॉट आवंटित किए जाने के बाद कहानी शुरू हुई, जिसे एमराल्ड कोर्ट के नाम से जाना जाने लगा। 2009 में दो टावरों एपेक्स और सेयेन के निर्माण की योजना थी। दोनों में 40 फ्लोर होने थे। हालांकि, इस बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी गई थी।

    9 साल बाद इतिहास बना ट्विन टावर

    9 साल बाद इतिहास बना ट्विन टावर

    अप्रैल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्विन टावर गिराने का आदेश पारित किया। मई 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गई। दलील दी गई कि ट्विन टावर का निर्माण नियमों के तहत ही हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2021 में ट्विन टावर को गिराने का हाईकोर्ट का ऑर्डर बरकरार रखा। अंत में करीब 9 साल की अदालती लड़ाई के बाद 28 अगस्त 2022 को सुपरटेक का ट्विन टावर जमींदोज होकर इतिहास बन गया।

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