अंबानी की रिलायंस कोई स्पेशल नहीं, मिल चुकी है सजा: नेवी चीफ
नई दिल्ली। इंडियन नेवी के चीफ एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि नौसेना के साथ जिस किसी भी कंपनी ने करार करने के बाद लापरवाही की है उन्हे कोई तरजीह नहीं दी गई, फिर चाहे वो अंबानी की रिलांयस कंपनी भी क्यों न हो। अनिल अंबनी की रिलायंस नवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड कंपनी ने इंडियन नेवी के साथ तटीय इलाकों में गश्त करने वाले 5 जहाजों को बनाने का करार किया था, लेकिन समय पर रिलायंस उनकी डिलेवरी नहीं कर पाया था। नेवी डे पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एडमिरल लांबा ने कहा कि रिलांयस की डिफेंस कंपनी पर कार्रवाई की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिपावाव डिफेंस कंपनी ने तटीय इलाकों में गश्त करने वाले 5 जहाजों के निर्माण के लिए 2,500 करोड़ रुपये में डील की थी, लेकिन 2011 में यह डील रिलांयस के पास चली गई। इनमें से पहले जहाज को 2015 में इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल करना था, जो रिलांयस ने देरी करते हुए पिछले साल जुलाई 2017 में जाकर डिलीवर किया। बता दें कि अब यह पिपावाव कंपनी रिलायंस की हो गई है, जिसे 2015 में खरीद लिया गया था।
आज प्रेस कांफ्रेस के दौरान नेवी चीफ ने स्पष्ट कर दिया कि आरएनईएल (रिलायंस नवल इंजीनियरिंग लिमिटेड) को बचाने के लिए कोई दबाव नहीं था। एडमिरल लांबा ने कहा, 'आरएनईएल को कोई विशेष तरजीह नहीं दी जा रही है। इसकी बैंक गारंटी नौसेना द्वारा रद्द कर दी गई है, इसलिए आरएनईएल के खिलाफ दंडनीय कार्रवाई की गई है।'
एडमिरल लांबा ने कहा कि फिलहाल रिलायंस डिफेंस के साथ हुए सौदे को तो रद्द नहीं किया गया है, लेकिन इस समझौते की जांच की जा रही है कि इसके साथ आगे क्या करने की जरुरत है।












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