'कानून से ऊपर कोई नहीं', राणा अय्यूब को लेकर UN के ट्वीट पर भारत का जवाब
नई दिल्ली, 21 फरवरी। पत्रकार राणा अय्यूब को लेकर संयुक्त राष्ट्र के ट्वीट पर भारत ने कड़ा प्रतिरोध जताया है। संयुक्त राष्ट्र के जेनेवा ऑफिस की तरफ से राणा अय्यूब को न्यायिक उत्पीड़न का शिकार बताया गया था। संयुक्त राष्ट्र, जेनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने इन आरोपों को निराधार और गैरजरूरी बताया है।
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बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने पत्रकार राणा अय्यूब के बैंक खातों से 1.77 करोड़ रुपये की धनराशि जब्त की है। राणा अय्यूब पर आरोप है कि ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म से इकठ्ठा की गई धनराशि का कथित रूप से व्यक्तिगत उद्येश्यों के लिए इस्तेमाल किया।
संयुक्त राष्ट्र ने एक ट्वीट में अय्यूब के खिलाफ लैंगिक और सांप्रदायिक हमलों का आरोप लगाया था। ट्वीट में इसे न्यायिक उत्पीड़न बताते हुए इसके खिलाफ जांच की मांग की गई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इसके जवाब में ट्वीट किया जिसमें लिखा था, "तथाकथित न्यायिक उत्पीड़न के आरोप निराधार और अनुचित हैं। भारत में कानून का शासन है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।"
क्या कहा संयुक्त राष्ट्र ने?
संयुक्त राष्ट्र ने अपने ट्वीट में लिखा "पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ लगातार होने वाले महिला विरोधी और सांप्रदायिक हमलों की भारतीय अधिकारियों द्वारा तुरंत और पूरी तरह से जांच की जानी चाहिए और उनके खिलाफ न्यायिक उत्पीड़न को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।"
क्या है मामला?
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, अय्यूब ने कथित तौर पर तीन अभियानों के लिए क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म केटो पर 2.69 करोड़ रुपये जुटाए और कथित तौर पर उनकी बहन इफ्फत शेख और पिता मोहम्मद अय्यूब वक्विफ के बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर कर दी गई।
राणा अय्यूब ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया था।
अय्यूब ने कहा था कि केटो पर किए गए अपने तीन सार्वजनिक अभियानों में, मैंने कुल 2,69 करोड़ रुपये जुटाए थे। मैंने अपने द्वारा किए गए राहत कार्यों के लिए सभी बिल और चालान प्रदान किए हैं, जो कि 40,45,644 रुपये हैं।












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