'दागी' तोमर को लेकर एक और खुलासा: बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से बनवाया था फजी माइग्रेशन
नयी
दिल्ली (ब्यूरो)। पुलिसिया पूछताछ के दौरान 'गजनी' बने दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। कानून की फर्जी डिग्री हासिल करने वाले जितेंद्र सिंह तोमर ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी का भी फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनवाया था। यह खुलासा खुद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की तरफ से वेरिफिकेशन के बाद किया गया है। सीधे शब्दों में कहें तो तोमर का फर्जीवाड़ा फैजाबाद से होते हुए वाया भागलपुर अब बुंदेलखंड पहुंच गया है। href="/news/india/somnath-bharti-s-wife-alleged-that-she-been-facing-domestic-violence-since-2010-360326.html"
target="_blank">(पिछले
5
सालों
से
पति
सोमनाथ
भारती
के
जुल्मों
की
शिकार
हैं
पत्नी
लीपिका!)
id="toptextpromo">
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id='top-searched-articles'>बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव से जितेंद्र सिंह तोमर पुत्र बलवीर सिंह तोमर को प्रवजन प्रमाण पत्र संख्या 156 दिनांक 20-04-1993 निर्गत होने या न होने के बारे में जानकारी मांगी गई थी। जांच के बाद इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेज को भेजे गये जवाब में कुलसचिव ने कहा है कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा 1993 में 26 मार्च से पांच मई के बीच 7001 से 7100 क्रमांक तक के माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए गए। उन्होंने बताया कि बुकलेट में क्रम संख्या 156 का कहीं जिक्र भी नहीं है। इस बात से तय हो गया है कि जितेंद्र सिंह तोमर के नाम से बना माइग्रेशन प्रमाण पत्र फर्जी है। href="/news/india/delhi-police-had-pre-planned-jitendra-singh-tomar-s-arrest-360191.html"
target="_blank">(पहले
ही
लिख
दी
गई
थी
जितेंद्र
तोमर
की
गिरफ्तारी
की
स्क्रिप्ट)
उल्लेखनीय
है कि विश्वविद्यालय पहले ही तोमर के दावे को खारिज कर चुका है। साथ ही तोमर के माइग्रेशन सर्टिफिकेट को भी विश्वविद्यालय ने फर्जी करार दिया था। अवध विश्वविद्यालय के प्रवक्ता यूएन शुक्ला ने तोमर के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनसे जुड़ा कोई भी दस्तावेज हमारे कॉलेज में उपलब्ध नहीं है।











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