Good News: भारत में कोरोना की चौथी लहर नहीं आएगी, यह कब मुमकिन है टॉप वायरोलॉजिस्ट ने बताया
नई दिल्ली, 8 मार्च: भारत के एक टॉप वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर टी जैकब जॉन ने संभावना जताई है कि देश में अब कोरोना वायरस की कोई चौथी लहर नहीं आएगी। उन्होंने कहा है कि जिन गणितीय मॉडलों के आधार पर ऐसी भविष्यवाणियां की गई हैं, उसका महामारी विज्ञान के नजरिए से फिलहाल कोई आधार नहीं दिख रहा है। उनका कहना है कि यह बीमारी अब एंडेमिक फेज में जा चुकी है और लोगों को इसके साथ ही जीना सीख लेना होगा, जो समय-समय पर बाकी वायरल की तरह सामने आती रहेंगी और फिर एकदम से खत्म हो जाएंगी।

भारत में कोरोना की चौथी लहर नहीं आएगी-वायरोलॉजिस्ट
भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर खत्म हो चुकी है। इसको देखते हुए मशहूर वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर टी जैकब जॉन ने कहा है कि उन्हें 'पूरा यकीन' है कि भारत में इसकी चौथी लहर नहीं आएगी। मंगलवार को देश में कोरोना वायरस के कुल 3,993 नए मामले सामने आए हैं, जो बीते 662 दिनों में सबसे कम हैं। भारत में तीसरी लहर की रफ्तार रुक गई है और 21 जनवरी से संक्रमण की संख्या घटनी शुरू हो गई थी, जब देश में इंफेक्शन के कुल मामले 3,47,254 पर थे।

'एंडेमिक स्टेज में पहुंचा वायरस'
जॉन इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के सेंटर ऑफ एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी के पूर्व डायरेक्टर रह चुके हैं। उनके मुताबिक यह भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि कोविड तीसरी लहर खत्म हो चुकी है और एक बार फिर से यह एंडेमिक फेज में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा है, 'मैं कहता हूं (एंडेमिक फेज में प्रवेश किया) क्योंकि एंडेमिक स्थिति की मेरी अपनी परिभाषा है 'कम और स्थिर दैनिक संख्या, सिर्फ मामूली उतार-चढ़ाव के साथ, यदि कोई हो, कम से कम चार सप्ताह तक। मेरी निजी अपेक्षा, इसलिए विचार, यह है कि हम चार हफ्तों से ज्यादा एंडेमिक फेज में रहेंगे। भारत के सभी राज्यों में एक जैसा ट्रेंड है, इससे मुझे विश्वास मिल रहा है।' 'एंडेमिक स्टेज' का मतलब होता है जब लोग वायरस के साथ जीना सीख लेते हैं।

चौथी लहर की संभावना कब तक नहीं है ?
जब उनसे सवाल किया गया कि कई वैज्ञानिकों ने यह भी दावा किया था कि कोरोना की तीसरी लहर नहीं आएगी। इसके बारे में उन्होंने बताया है कि कोरोना की तीसरी लहर ओमिक्रॉन की वजह से पैदा हुई, जिसके बारे में किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया था। इसलिए, 'तीसरी लहर नहीं आएगी' यह संभावना उस समय मौजूद वेरिएंट के आधार पर जताई गई थी। इसी आधार पर उन्होंने कहा है, 'जब तक कोई अप्रत्याशित वेरिएंट नहीं आता जो अल्फा, बीटा, गामा या ओमिक्रॉन से अलग व्यवहार करे, तब तक कोई चौथी लहर नहीं होगी।'

महामारी विज्ञान और वायरस वेरिएंट के आधार पर अनुमान
वैज्ञानिक के मुताबिक, 'अभी तक भारत में जो भी जानकारी उपलब्ध है, महामारी विज्ञान और वायरस वेरिएंट के बारे में और जो ग्लोबल ट्रेंड है, हम काफी विश्वास के साथ कह सकते हैं कि कोई चौथी लहर नहीं पैदा होगी,गणितीय मॉडल की भविष्यवाणी के बावजूद। ऐसी स्थिति में मॉडल पद्धति मान्य नहीं है।' गौरतलब है कि आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने 22 जून से देश में कोरोना की चौथी लहर आने की भविष्यवाणी की हुई है, जो अक्टूबर के आखिर तक रहेगी।

'इंफ्लुएंजा से जुड़ी बीमारियों का यही ट्रेंड रहा है'
बड़े वायरोलॉजिस्ट अपने दावे के पीछे कुछ ठोस तर्क रख रहे हैं। उनका कहना है सांस से फैलने वाली पिछली सभी महामारी इंफ्लुएंजा की वजह से होती है और हर इंफ्लुएंजा महामारी दो से तीन लहर के बाद खत्म हो जाती है और एंडेमिक फेज में चली जाती है। इसका अर्थ ये हुआ कि मौसम में बदलाव के साथ-साथ इसके केस आते हैं फिर कम हो जाते हैं। लेकिन, इसके बावजूद इस वायरस के साथ म्यूटेशन का खतरा बरकरार रहेगा।












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