पेगासस मामले में सभी आरोपों को बीजेपी ने किया खारिज, कहा- सरकार के खिलाफ विपक्ष के पास कोई सबूत नहीं
नई दिल्ली, 19 जुलाई: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ। इस बीच अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने 'द पेगासस प्रोजेक्ट' नाम से एक जांच रिपोर्ट जारी की। जिसमें दावा किया गया कि भारत सरकार इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर कई पत्रकारों, नेताओं आदि की जासूसी कर रही है। इसके बाद से देशभर में जमकर हंगामा हो रहा है। साथ ही विपक्षी दल गृहमंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांग रहे। हालांकि बीजेपी भी सरकार के बचाव में उतर आई है। साथ ही सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
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बीजेपी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसे स्तरहीन आरोप लगाए हैं, जो राजनीतिक शिष्टाचार से परे हैं। बीजेपी कांग्रेस द्वारा लगाए गए पेगासस मामले के सारे आरोपों को खारिज करती है। कांग्रेस ने अब तक पेगासस मामले में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पेगासस मामला मानसून सत्र से पहले ही शुरू क्यों होता है? क्या कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से लगे हुए थे कि यह मामला मानसून सत्र से पहले ही शुरू करना है ताकि देश में एक नया माहौल बनाया जाए।
प्रसाद के मुताबिक इस मामले में पूरी स्थिति अजीब है। कंपनी (एनएसओ ग्रुप) इसका खंडन कर रही है। साथ ही उसने साफ किया कि उसके अधिकांश उत्पादों का उपयोग पश्चिमी देश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी विपक्ष भारत को निशाना बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी देश में कुछ महत्वपूर्ण होता है, तो इस प्रकार के प्रश्न उठाए जाते हैं। जब 2020 में ट्रंप भारत के दौरे पर आए, तो दंगे भड़का दिए गए। उससे पहले 2019 के चुनाव के दौरान भी पेगासस की कहानी सामने लाई गई। अब जब संसद का महत्वपूर्ण मानसून सत्र शुरू हुआ तो फिर से वही पिटारा खोल दिया गया।
रविशंकर के मुताबिक अभी तक इस मामले में सबूत का एक टुकड़ा भी सामने नहीं आया है, जो पेगासस की कहानी का संबंध बीजेपी या भारत सरकार के साथ साबित करे। क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि एमनेस्टी जैसी संस्थाओं का कई मायनों में भारत विरोधी घोषित एजेंडा था। जब आप उनसे उनके फंडिंग का स्रोत पूछते हैं, तो वे कहते हैं भारत में काम करना मुश्किल है।












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