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सांसदों की अटेंडेंस पर नहीं पड़ा विशेष भत्ता बंद किए जाने का कोई असर, रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली, 18 जनवरी। देश के उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू के कहने पर हाल ही में राज्यसभा सचिवालय द्वारा किए गए विश्लेषण में बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार संसदीय स्थायी समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए मिलने वाले विशेष भत्ते के बंद होने के बाद भी मीटिंग में सांसदों की उपस्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है, बल्कि सूत्रों का कहना है कि कोरोना काल में उनकी अटेंडेंस बढ़ी ही है। बता दें कि सांसदों के मिलने वाला भत्ता साल 2018 में बंद कर दिया गया था, एम वेंकैया नायडू ने कुछ महीने पहले इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था।

No effect of closure of special allowance on the attendance of MPs disclosed in the report

बता दें कि नायडू ने यह रिपोर्ट तब मांगी थी जब कुछ सांसदों ने उनके साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि विशेष भत्ता से कई सांसदों को नियमित रूप से बैठकों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलता था। रिपोर्ट में उस समय के संसदीय स्थायी समिति की बैठकों में उपस्थिति का विश्लेषण किया जब सांसद 2018 से पहले भत्ते के हकदार थे। सांसदों को संसद और हाउस पैनल की बैठकों में भाग लेने के लिए दैनिक भत्ते के रूप में 2,000 रुपए मिलते हैं।

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    दिवंगत बीजेपी नेता अरुण जेटली को वित्त मंत्री का पद सौंपे जाने पर इस भत्ते को समाप्त करने से पहले तक सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए हवाई यात्रा की लागत का 25 फीसदी पैसा भी भत्ते के रूप में मिलता था। सचिवालय द्वारा रिपोर्ट में भत्ता बंद किए जाने के बाद के प्रभाव का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान संसदीय पैनल ने बैठकों पर अधिक समय बिताया है, जबकि संसद के सत्रों में अक्सर व्यवधान या वाशआउट का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक 2016-17 की तुलना में 2019-20 के दौरान कोविड के बावजूद सांसदों की उपस्थिति में वृद्धि हुई।

    कब बंद हुआ था भत्ता?
    गौरतलब है कि 1 अप्रैल, 2018 से सांसदों के मिलने वाला विशेष भत्ता बंद कर दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक 2016-17 के दौरान जब भत्ता पूरे वर्ष के लिए उपलब्ध था तब डीआरएससी की 119 बैठकों में औसत उपस्थिति 47.64 फीसदी थी और 2019-20 के दौरान जब भत्ता नहीं मिलता था, तब 119 बैठकों के लिए उनकी अटेंडेंस बढ़कर 48.79 फीसदी हो गई। अप्रैल से पहले तक 2017-18 के दौरान 6 महीने के लिए विशेष भत्ता दिया गया था।

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