इस गांव में पिछले 100 सालों से नहीं मनाई गई होली, रंग खेलने वालों को सताता है मौत का डर

नई दिल्ली: रंगों के त्योहार होली का देश में अलग ही महत्व है। मथुरा, वृंदावन समेत कई खास जगहों पर इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे कोरोना महामारी के चलते इस साल कई राज्यों ने सार्वजनिक रूप से होली मनाने पर रोक लगा रखी है, लेकिन लोग त्योहार के पहले से ही जश्न में सराबोर हैं। आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि भारत में कई गांव ऐसे हैं, जहां पर होली का जश्न फिका रहता है। एक जगह तो ऐसी मान्यता है कि जिसने भी होली मनाई उसकी मृत्यु निश्चित है।

100 सालों से नहीं मनाई गई होली

100 सालों से नहीं मनाई गई होली

उत्तर भारत के प्रमुख राज्य झारखंड में होली धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन एक गांव यहां पर ऐसा है, जहां लोग रंगों से डरते हैं। यहां रहने वाले बुजुर्गों के मुताबिक दुर्गापुर में बोकारो के कसमार ब्लॉक में 1000 से ज्यादा लोग रहते हैं, लेकिन वो होली नहीं मनाते। ये परंपरा आज से नहीं बल्कि 100 सालों से चली आ रही है। माना जाता है कि अगर किसी ने यहां पर होली खेली तो उसकी मौत निश्चित है। इसके पीछे एक किस्सा भी काफी प्रचालित है।

राजा ने मौत के वक्त कही ये बात

राजा ने मौत के वक्त कही ये बात

स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक कई दशकों पहले यहां पर दुर्गा प्रसाद नाम के राजा राज करते थे। उन्होंने एक बार होली का त्योहार धूमधाम से मनाया। जिसकी सजा राजा को मिली, जहां होली के दिन उनके बेटे की मौत हो गई। इसके बाद राजा की भी मौत होली वाले दिन से हुई। राजा ने मौत से पहले गांव के लोगों से कभी भी होली नहीं मनाने की बात कही थी। जिसके बाद से इस गांव में रंग नहीं उड़े। गांव वालों का मानना है कि अगर उन्होंने होली मनाई तो राजा का भूत गांव में कहर मचा देगा। साथ ही अकाल, भूखमरी और महामारी भी फैल सकती है। वैसे तो होली ना मनाने की प्रथा सिर्फ दुर्गापुर में है, लेकिन डर के मारे आसपास के लोग भी रंगों से दूर रहते हैं।

उत्तराखंड में भी दो गांव ऐसे

उत्तराखंड में भी दो गांव ऐसे

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग नाम से एक जिला है, जहां पर अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का संगम होता है। इस जिले के कुरझां और क्विली नाम के दो गांव ऐसे हैं, जहां पर होली नहीं मनाई जाती है। करीब 150 सालों से ये परंपरा चली आ रही, जिसका ग्रामीण आज भी पालन करते हैं। हालांकि यहां पर भूत-प्रेत की कहानी नहीं है। मान्यता के अनुसार इलाके की प्रमुख देवी त्रिपुर सुंदरी का यहां पर वास है और उनको शोर-शराबा बिल्कुल भी नहीं पसंद। जिस वजह से यहां के लोगों ने रंगों से दूरी बना ली है।

(तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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