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नीतीश कुमार खेल सकते हैं बड़ा दांव, 2019 में विधानसभा भंग कर करा सकते हैं चुनाव

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर माहौल धीरे-धीरे गरमा रहा है, अंदरखाने राजनीतिक दलों में आपसी गठजोड़ की चर्चा की खबरें तो आती हैं लेकिन ठोस तौर पर फिलहाल अभी स्थिति साफ नहीं है। एनडीए एकजुट होकर चुनाव में उतरने की बात कर रहा है लेकिन शिवसेना कह चुकी है कि वो अकेले चुनाव लड़ेगी। बिहार में उपेंद्र कुशवाहा को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। दूसरी तरफ विपक्ष के दल भी अपनी ढपली अपना राग आलाप रहे हैं। इस बीच कहा जा रहा है कि बिहार में नीतीश कुमार बड़ा राजनीतिक दांव खेल सकते हैं। नीतीश विधानसभा को भंग कर 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा के चुनावों में भी उतरने की तैयारी में हैं। वैसे बिहार विधानसभा का कार्यकाल 2020 के अंत में समाप्त होना है।

modi nitish
एक साथ चुनाव के पक्षधर
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी पहले से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ होना चाहिए ताकि देश में पैसे और संसाधनों की बचत हो सके और इस पर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात का समर्थन कर चुके हैं। अब बिहार में जिस राजनीतिक स्थिति का सामना नीतीश कुमार कर रहे हैं ऐसे में वो जल्द चुनावों में जाने का फैसला ले सकते हैं। नीतीश को लग रहा है कि ये स्थिति उन्हें दोनों चुनावों में सियासी फायदा पहुंचाएगी।

शुरू हो चुकी है तैयारी

शुरू हो चुकी है तैयारी

सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार ने अपने कार्यकताओं को संदेश दे दिया है कि वो लोकसभा और विधानसभा चुनवों की तैयारी में लग जाएं। नीतीश कुमार ने पार्टी की नेशनल एग्जिक्यूटिव की बैठक की है और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगे की रणनीति पर विचार विमर्श किया है। खबर है कि पार्टी ने तय किया है कि नवंबर तक पार्टी के अंदर के ढांचे को दुरुस्त कर लिया जाए। पंचायत स्तर पर और बूथ लेवल पर कमेटियां गठित करने का भी काम किया जाए।
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दबाव की रणनीति

दबाव की रणनीति

नीतीश कुमार को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कीशोर का भी अब साथ है और ऐसे में वो इस वक्त राज्य में ज्यादा लोकसभा सीटें अपने लिए लेने को लेकर बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडी(यू) सिर्फ दो ही सीटें जीत पाई थी लोकिन इस बार पार्टी राज्य में बीजेपी से वापस गठबंधन के बाद कम से कम 17 सीटे मांग रही है। जबकि बीजेपी 12 से ज्याद सीटें नीतीश को नहीं देना चाहती। ऐसे में विधानसभा के मध्यावधि चुनाव का दबाव डालकर वो बीजेपी से सीटों के सवाल पर बेहतर तोल-मोल कर सकते हैं।

दोनों को होगा फायदा

दोनों को होगा फायदा

बिहार विधानसभा का चुनाव लोकसभा के साथ कराने में जेडीयू और बीजेपी दोनों को फायदा हो सकता है। सबसे बड़ा फायदा सीटों के तालमेल को लेकर होगा। अगर बीजेपी नीतीश कुमार को लोकसभा में कम सीटें देने पर अड़ी रहती है तो नीतीश भी विधानसभा चुनावों में ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ सकते हैं। ऐसे में लोकसभा नहीं तो राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका बीजेपी से बड़ी रहेगी। दूसरी ओर बीजेपी के लिए फिलहाल केंद्र की सत्ता में वापसी ज्यादा जरूरी है और राज्य में उसे छोटे भाई की भूमिका निभाने में कोई दिक्कत नहीं है।
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विपक्ष को जोर का झटका

विपक्ष को जोर का झटका

अभी की स्थिती में राज्य में नीतीश कुमार को मजबूत विपक्ष के सामने सरकार चलाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अपने 80 विधायकों के बूते आरजेडी नेता तेजस्वी यादव हर मोर्च पर नीतीश को टक्कर दे रहे हैं। ऐसे में जितना जल्दी चुनाव हो जाए अच्छा होगा। नीतीश के लिए दूसरी मुफीद स्थिति ये है कि खुद आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव जेल में हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव तक वो बाहर आ पाएंगे ये मुश्किल लगता है। लालू के कुनबे में अनबन की खबरें भी हैं। जहां तक कांग्रेस की बात है तो वो बिहार में अपने वजूद की लड़ाई लड़ ले तो वही बहुत है। ऐसे में नीतीश कुमार के लिए दोनों चुनावों में एक साथ जाना फायदा का सौदा लग रहा है।

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