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निर्भया के दोषियों को फांसी: 2012 में हुए गैंगरेप का वो अहम सबूत, जिसने दिलाया इंसाफ!

निर्भया के दोषियों को फांसी, निर्भया गैंगरेप का वह अहम सबूत, जिसने दिलाया इंसाफ!

नई दिल्ली। 7 साल बाद निर्भया गैंगरेप मामले में पीड़िता के परिवार को इंसाफ मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के चारों आरोपियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी। लंबे इंसजार और लंबी लड़ाई के बाद निर्भया के परिवार को इंसाफ मिला है। वहीं दोषियों के वकील ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में क्‍यूरेटिव पिटिशन डालेंगे। 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया के साथ हैवानियत की गई। निर्भया के साथ कीा गई दरिंदगी की खबरें जब सामने आई तो देश और दुनियाभर के लोगों को झकझोर दिया। 7 साल लंबे चले इस केस में अहम कड़ी निभाई उस बस ने, जिसमें निर्भया के दरिंदगी को अंजाम दिया गया।

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     बस के अंदर मिले सबूत

    बस के अंदर मिले सबूत

    16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली की सड़कों पर चलती बस में निप्भया के साथ गैंगरेप की वारदात को अंदाम दिया गया। इस पूरे केस में बस और उसके अंदर मिले सबूत ने पूरे मामले की जांच के दौरान हम कड़ी साबित हुए थे। इस अहम सबूत ने निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया। निर्भया केस में अहम रोल निभाने वाली सफेद बस आजकल कंडम हालत में दिल्ली के सागरपुर इलाके में खड़ी है।

     बस नंबर 0149 में हुई थी दरिंदगी

    बस नंबर 0149 में हुई थी दरिंदगी

    सफेद रंग की बस, जिसका नंबर 0149 था 16 दिसंबर की रात रविदास कैंप में रोजाना की तरह खड़ी थी। बस के मुख्य ड्राइवर राम सिंह ने प्लानिंग की और अपने साथियों मुकेश, अक्षय, पवन, विनय और एक नाबालिग बस क्लीनर के साथ बस लेकर चल पड़ा। राम सिंह ने आरके पुरम में CNG डलवाई और फिर अफ्रीका एवेन्यू से होते हुए IIT फ्लाईओवर पुलिस कॉलोनी पर पहुंचती है, जहां एक शख्स बस को रोकता है और उसमें सवार हो जाता है। बस में सवार राम सिंह और उसके साथी पहले से ही प्लान बनाकर निकले थे, उन्होंने उस शख्स को लूटा और उसे बीच रास्ते पर फेंककर निकल गए। बस वहां से मुनिरका बस स्टैंड पहुंची, जहां निर्भया और उसका दोस्त बस में सवार हो गए। बस में महरून पर्दे लगे थे। ड्राइवर के पास शिवजी की मूर्ति लगी थी।

     सबूत मिटाने की कोशिश , लेकिन नाकामियाब

    सबूत मिटाने की कोशिश , लेकिन नाकामियाब

    बस में सवार होते ही वो कंडक्टर के पीछे वाली सीट पर बैठ गए। निर्भया को देखकर एक आरोपी अश्लील टिप्पणी करने लगा। जैसे ही उसके दोस्त ने रोका तो बस में सवार उसके बाकी साथियों ने उसके साथ मारपीट की। निर्भया का दोस्त बस की सीट के नीचे छुप गया। उसके बाद निर्भया के साथ बारी-बारी से सभी आरोपियों ने रेप किया और हैवानियत की। जैसे ही बस महिपालपुर पहुंची, उन्होंने दोनों को चलती बस से नीचे फेंक दिया और बस से रौंदने की कोशिश की। इसके बाद आरोपियों ने अपने और निर्भया और उसके दोस्त के पड़ते रविदास कैंप पहुंच कर जलाए। बस को धो दिया, ताकि सारे सबूत खत्म हो जाए। भगवान की मूर्ति हटा दी।

     पुलिस को फोन पर मिली सफेद बस की जानकारी

    पुलिस को फोन पर मिली सफेद बस की जानकारी

    जांच के दौरान 17 दिसंबर को पुलिस को फोन पर किसी ने पहली सफेद रंग की बस, जिसपर 'यादव' लिखा था उसकी जानकारी दी। सीसीटीवी से भी कुछ सुराग मिले थे,लेकिन बस का नंबर नहीं मिला था। पुलिस के एक मुखबिर ने उन्हें 'यादव ट्रेवल्स' के सफेद बस की जानकारी दी, जो आरके पुरम रविदास कैंप में लगी थी। फिर क्या था पुलिस ने बस के साथ-साथ के इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी राम सिंह को गिरफ्तार कर दिया। पुलिस को बस से निर्भया के बाल, उसके शरीर के मांस के कुछ टुकड़े और खून के नमूने मिले। पुलिस को बस से वह लोहे की रॉड भी मिली, जिससे निर्भया को पीटा गया था। बस की सीट पर खून के निशान मिले थे। ये सबूत इस केस के लिए अहम साबित हुए।

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