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निर्भया केस- रेप के 4 दोषियों को फांसी पर लटकाकर पवन जल्‍लाद ने तोड़ा अपने दादा का रिकॉर्ड

नई दिल्‍ली। सात साल के बाद आखिरकार निर्भया के साथ गैंगरेप कर बेरहमी से उसकी हत्‍या करने वाले चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। मेरठ से आए पवन जल्‍लाद ने इन दोषियों को तिहाड़ जेल में 20 मार्च को तड़के फांसी पर लटकाया है। इस फांसी के साथ ही पवन जल्‍लाद ने अपने ही दादा का एक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गौरतलब है कि पवन जल्‍लाद उस परिवार का हिस्‍सा हैं जिसने देश के हाई -प्रोफाइल केसेज को करीब से देखा है।

दादा ने दी थी एक साथ दो दोषियों को फांसी

दादा ने दी थी एक साथ दो दोषियों को फांसी

पवन जल्लाद के दादा कालूराम भी एक जल्‍लाद थे और अब पवन ने अपने ही दादा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कालूराम ने एकसाथ दो दोषियों को फांसी दी थी जबकि पवन ने आज एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाया है। पवन ऐसे परिवार का सदस्य है जिसकी चार पीढ़ियां फांसी देती आ रही हैं। पवन के परदादा लक्ष्मणराम अपने परिवार में जल्लाद का काम करने वाले पहले शख्स थे। तब देश में अंग्रेजी हुकूमत थी।

परदादा ने इंदिरा गांधी के हत्‍यारों को चढ़ाया फांसी पर

परदादा ने इंदिरा गांधी के हत्‍यारों को चढ़ाया फांसी पर

दिल्ली के जीसस मेरी कॉलेज की स्टूडेंट्स गीता चोपड़ा व उनके भाई संजय चोपड़ा की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी रंगा-बिल्ला को लक्ष्मणराम के बेटे कालूराम ने फांसी पर लटकाया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और षड़यंत्र रचने वाले केहर सिंह को भी कालूराम ने फांसी पर चढ़ाया था। कालूराम ने बाद में यह काम बेटे मम्मू सिंह को सौंप दिया। मम्मू ने आखिरी बार साल-1997 में जबलपुर के कांताप्रसाद तिवारी को फांसी दी थी।

दादा के साथ गए थे जेल में

दादा के साथ गए थे जेल में

मम्मू की मौत से पहले ही दादा कालूराम ने पौत्र पवन को जल्लाद के लिए तैयार कर लिया था। पवन ने बताया था कि उसके दादा ने एकसाथ दो लोगों को फांसी पर लटकाया था, लेकिन चार दोषियों को एकसाथ फांसी देकर वह इस रिकॉर्ड को तोड़ेंगे। 58 साल के पवन बताते हैं कि पहली बार वह आगरा जेल में 1988 में गए थे। उस वक्त रेप के आरोपी जुम्मन को फांसी देने उसके दादा गए थे।

अपने काम पर पवन को गर्व

अपने काम पर पवन को गर्व

पवन ने अपने दादा-परदादा से फांसी देने की टेक्निक समझी। फांसी देने के पहले कई बार रिहर्सल किया जाता है ताकि इसमें कोई चूक ना हो। पवन कहते हैं, बहुत लोगों के लिए जल्लाद एक गाली है लेकिन उनको अपने काम पर गर्व है।चारों दोषियों को फांसी देने के बाद उनके शवों को दीनदयाल उपाध्‍याय अस्‍पताल ले जाया गया। यहां पर मेडिकल ऑफिसर ने चारों दोषियों को मृत घोषित कर दिया था। शवों का पोस्‍टमार्टम भी एक प्रक्रिया के तहत हुआ और बताया जा रहा है कि पोस्‍टमार्टक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।

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