आसिया आंद्राबी को ISI, लश्कर और जमात-उल-दावा से मिलता था फंड, NIA की पूछताछ में खुलासा
नई दिल्ली। टेरर फंडिंग केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया आंद्राबी ने खुलासा किया है कि वह पाकिस्तानी सेना के एक अफसर के जरिए जमात-उल-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना आतंकी हाफिज सईद के करीब आई थी। वह अधिकारी दुख्तारन-ए-मिल्लत नेता आंद्राबी का रिश्तेदार था। एनआईए आंद्राबी के अलावा दो अलगाववादी नेताओं मसरत आलम भट्ट और शब्बीर शाह से पूछताछ कर रही है।

ISI से फंड लेती थी अलगाववादी नेता आसिया आंद्राबी
दिल्ली की एक स्पेशल अदालत ने तीनों प्रमुख अलगाववादी नेताओं आसिया आंद्राबी, शब्बीर शाह और मसरत आलम को 10 दिन की NIA कस्टडी में भेज दिया था। इन तीनों को एनआईए ने टेरर फंडिंग केस में गिरफ्तार किया था। कश्मीर विश्वविद्यालय से साइंस में स्नातक आसिया आंद्राबी 4 साल पहले पाकिस्तानी झंडा फहराने और पाकिस्तानी राष्ट्रगान गाने के कारण खबरों में आई थी।

आंद्राबी का भतीजा पाक सेना में कैप्टन रैंक का अधिकारी
आंद्राबी के इस कारनामे के पीछे हाफिज सईद का बड़ा हाथ माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक,आंद्राबी का भतीजा पाकिस्तान सेना में कैप्टन रैंक का अफसर है। जबकि एक अन्य रिश्तेदार पाक सेना और आईएसआई के संपर्क में है। आंद्राबी के रिश्तेदार दुबई में भी रहते हैं जहां से वह फंड प्राप्त करती है और भारत के खिलाफ गतिविधियों में इसका इस्तेमाल करती है। आंद्राबी के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है जिसके तहत जमात-उल-दावा और लश्कर सरगना हाफिज सईद उसे फंड मुहैया कराता था।

फंड का इस्तेमाल भारत के खिलाफ गतविधियों में करती थी
इस फंड का इस्तेमाल पत्थरबाजों और हुर्रियत समर्थकों को बांटने के लिए किया जाता था और श्रीनगर के अलावा घाटी के अन्य इलाकों में इसके जरिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कराया जाता था। आंद्राबी के अलावा शब्बीर शाह और मसरत आलम तिहाड़ जेल में बंद हैं। आसिया आंद्राबी कश्मीर में सुरक्षाबलों के खिलाफ महिलाओं को भड़काती थी। नफरत भरे भाषणों के जरिए आंद्राबी भारत के खिलाफ झंडा बुलंद करती थी। 30 मई, 2017 को एनआईए ने अलगाववादी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया था और उनपर आतंकी संगठनों के साथ संबंध के आरोप लगाए थे। एनआईए ने आसिया अंद्राबी को 6 जुलाई 2018 को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था।












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