गर्भवती को लादकर 12 किमी पैदल चला पति, नवजात की मौत, मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में प्रसव पीड़ा के बाद गर्भवती पत्नी को 12 किमी पैदल चलकर एंबुलेंस तक पहुंचाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। मानवाधिकार आयोग ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए चीफ सेक्रेटरी और आन्ध्र प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है। आयोग ने चार हफ्तों के भीतर इस पर रिपोर्ट देने को कहा है।

29 जुलाई का है मामला

29 जुलाई का है मामला

29 जुलाई को गर्भवती महिला के पति और गांव के लोग उसे जंगलों के रास्ते से 12 किमी लेकर चले थे क्योंकि गांव तक एंबुलेंस नहीं आ सकती थी। पति ने बांस से एक कपड़ा बांधकर इसमें पत्नी को लिटाया और कुछ लोगों के साथ अस्पताल के लिए ले गया। काफी समय लगने के चलते रास्ते में महिला ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन उसकी जान ना बच सकी। अस्पताल में पहुंचने से पहले ही नवजात की मौत हो गई।

जच्चा के स्वास्थ्य में सुधार

जच्चा के स्वास्थ्य में सुधार

जच्चा का इलाज करने वालीं डॉक्टर एसएन ज्योति ने बताया कि अस्पताल आने में लगे समय की वजह से उसको काफी नुकसान हुआ लेकिन अब वो ठीक है और तेजी से उसकी सेहत में सुधार हो रहा है। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में गर्भवती जिंदम्‍मा को 29 जुलाई को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जंगलों के बीच होने की वजह से वहां ऐम्‍बुलेंस नहीं पहुंच सकती थी। उसकी तबीयत बिगड़ने पर पति कुछ और लोगों को साथ ले डंडों और कपड़ों की डोली बना उसे अस्‍पताल ले जाने का फैसला किया गया।

रास्ते में ही बच्चे का जन्म

रास्ते में ही बच्चे का जन्म

अस्पताल के लिए करीब 12 किमी पैदल चलना था। रास्‍ते में ही उसने बच्‍चे को जन्‍म दिया लेकिन उसकी मौक हो गई। जिंदम्‍मा को पार्वतीपुरम आईटीडीए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी तबीयत में सुधार है।

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