अब सुषमा स्वराज और जेटली भी राष्ट्रपति की रेस में
देश के अगले राषट्रपति चुनाव से पहले जेटली और सुषमा स्वराज ने जताई इच्छा, मुरमू के नाम को आगे बढ़ा सकती है पार्टी
नई दिल्ली। देश के अगले राष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद इस पद के लिए उम्मीदवार की तलाश और तेज हो गई है। लेकिन सोमवार रात को जो खबर सामने आई है उसके मुताबिक सुषमा स्वराज और अरुण जेटली देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। सूत्रों की मानें तो दोनों ही नेताओं ने सोमवार को देश का अगला राष्ट्रपति बनने की इच्छा जाहिर की है।

पीएम मोदी की पसंद द्रौपदी मुरमू
देश के अगले राष्ट्रपति पद के लिए रेस तेज हो गई है, इसके लिए भाजपा ने बकायदा एक पैनल बना दिया है जो इस बात का फैसला लेगा कि देश के अगले राष्ट्रपति पद के लिए कौन उम्मीदवार होगा। रायसीना हिल्स की दावेदारी के लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिसमें नजमा हेपतुल्ला भी शामिल हैं, वहीं माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुरमू हैं।

रेस में सबसे आगे मुरमू
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति पद की रेस में द्रौपदी मुरमू सबसे आगे हैं, ऐसे में अगर उन्हें चुना जाता है तो देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी। मुरमू को राष्ट्रपति बनाने से भाजपा को कई लाभ मिल सकते हैं। एक तरफ जहां पार्टी दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी करने कोशिश करेगी तो दूसरी तरफ अगर विपक्ष उनके नाम का विरोध करता है तो पार्टी विपक्ष पर दलित दलित विरोधी कार्ड खेल सकती है।

कौन हैं द्रौपदी मुरमू
द्रौपदी मुरमू की आयु 58 वरष हैं और वह ओडिशा के उपरभेड़ा गांव की रहने वाली हैं, वह मयूरभंज जिले से भाजपा का आदिवासी चेहरा रही हैं। वह ओडिशा से पहली महिला है जिन्हें राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने झारखंड के राज्यपाल का जिम्मा दो साल पहले संभाला था। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर 1997 में शुरु किया था और राजरंगपुर से विधायक बनी थी। राजनीति में आने से पहले वह वह शिक्षक थी और रायरंगपुर के श्री अरविंदो इंटीग्रल संस्थान में पढ़ाती थी।

राजनीतिक लाभ के लिए मुरमू का नाम आगे
भाजपा ओडिशा में अपने पैर जमाना चाहती है, ऐसे में मुरमू को आगे करने से पार्टी को फायदा मिल सकता है। पार्टी ओडिशा में बीजेडी के खिलाफ एक माहौल बनाने में भी काफी हद तक सफल हो सकती है। हाल ही में निकाय चुनावों में जिस तरह से भाजपा को सफलता मिली थी, उसके बाद अगर मुरमू के नाम को आगे बढ़ाया जाता है तो बीजेडी भी उनके नाम का समर्थन करेगी। इसके अलावा एकजुट विपक्ष के लिए मुरमू के नाम का विरोध करना आसान नहीं होगा।

क्या गहलोत हो सकते हैं उम्मीदवार
मुरमू के अलावा पार्टी के खेमे में थावर चंद गहलोत का नाम भी आगे चल रहा है। सूत्रों की मानें तो गहलोत के नाम पर भी चर्चा हुई है, हालांकि अभी तक किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। गहलोत का जन्म 18 मई 1948 में हुआ था और वह मौजूदा सरकार में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं। गहलोत मध्य प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। इससे पहले वह 1996, 2009 में लोकसभा सांसद रह चुके है।

सुषमा स्वराज या अरुण जेटली
जिस तरह से सोमवार को इन दोनों शीर्ष नेताओं ने राष्ट्रपति बनने की इच्छा जाहिर की है, उसके बाद दोनों के नाम पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सुषमा स्वराज के नाम पर चर्चा काफी तेज है लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी जेटली के नाम को आगे नहीं बढ़ाना चाहेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि जुलाई माह में खराब स्वास्थ्य के चलते सुषमा स्वराज विदेश मंत्रालय का जिम्मा छोड़ सकती हैं। अगले कैबिनेट फेरबदल में वह इस जिम्मेदारी से मुक्ति पा सकती हैं।

राष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम
नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख- 14 जून 2017
नामांकन की आखिरी तारीख- 28 जून
आवेदकों की समीक्षा- 29 जून
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख- 1 जुलाई
चुनाव की तारीख- 17 जुलाई सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
मतगणना का दिन - 20 जुलाई।












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