नई संसद का उद्घाटन: कौन सी पार्टी होगी शामिल, कौन करेगी बहिष्कार, देखें पूरी लिस्ट यहां
New Parliament Inaugration: नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर विवाद छिड़ गया है कि कौन इस कार्यक्रम में शामिल होगा और कौन नहीं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन सी पार्टी सरकार के कार्यक्रम में शामिल होगी और कौन नहीं।

New Parliament Inaugration: नई संसद के उद्घाटन को लेकर सियासत लगातार गर्माई हुई है। विपक्षी पार्टियां लगातार राष्ट्रपति से इसके उद्घाटन की मांग कर रही हैं। इतना ही नहीं मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा लेकिन वहां याचिका खारिज हो गई। अदालत के फैसले के बाद अब यह फाइनल हो गया कि 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इसका उद्घाटन करेंगे।
अब तक 25 पार्टियों ने नई संसद के उद्घाटन में शामिल होने का ऐलान किया है। जिनमें से 7 पार्टियां सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा नहीं हैं। वहीं 21 विपक्षी दलों ने कहा है कि वे समारोह में शामिल नहीं होंगे।चलिए इन विवादों के बीच जानते हैं कि कौन सी पार्टी नई संसद के उद्घाटन में होगी शामिल और कौन सी नहीं होगी शामिल?
कौन-कौन सी पार्टी संसद के उद्घाटन में होगी शामिल
एनडीए की पार्टी
नेशनल पीपुल्स पार्टी, मेघालय
शिवसेना (शिंदे गुट)
एआईडीएमके
आईएमकेएमके
नेशलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा
जन नायक पार्टी
एजेएसयू
आरपीआई
मिजो नेशनल फ्रंट
तमिम मनीला कांग्रेस
आईटीएफटी (त्रिपुरा)
बोडो पीपुल्स पार्टी
पीएमके
महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी
अपना दल
असम गण परिषद
गैर एनडीए पार्टियां
लोक जनशक्ति पार्टी (पासवान)
बीजू जनता दल
बहुजन समाज पार्टी
तेलगू देशम पार्टी
अकाली दल
जेडीएस
ये 21 दल नहीं होंगं शामिल?
जो पार्टियां संसद के उद्घाटन का बहिष्कार कर रही हैं वे हैं कांग्रेस, माकपा, भाकपा, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी, शिवसेना (उद्वव गुट), डीएमके, जेडीयू, आरजेडी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, केरल कांग्रेस (एम), आरसीपी, आरएलडी, एमडीएमके, विदुथलाई चिरुथिगल काची, ओवैसी की पार्टी AIMIM,रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी , ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट।
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नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों?
पुराना संसद भवन ब्रिटिश भारत में तैयार किया गया था। 1921 में इसका निर्माण शुरू होकर 1927 में पूरा हुआ यानी इसे बने लगभग 100 साल हो जायेंगे। वर्तमान में अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकों के मामलें में यह भवन उपयुक्त नहीं है। इसलिए इन सभी जरूरतों सहित लगभग डेढ़ अरब की आबादी को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए एक नये भवन की जरुरत कई सालों से महसूस की जा रही थी।












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