नए संसद भवन का उद्घाटन हो गया, अब नए पीएम आवास-PMO समेत इन इमारतों के निर्माण पर फोकस
नए संसद भवन का निर्माण एक बहुत बड़े रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके उद्घाटन के साथ ही चर्चा उन इमारतों को लेकर शुरू हो गई है, जो भविष्य में बनकर तैयार होने हैं।

नए संसद भवन का निर्माण केंद्र सरकार के एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को किया है। आगे नया वाइस प्रेसिडेंट एन्क्लेव, कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग, डिफेंस एन्क्लेव, मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट चैंबर और नया प्रधानमंत्री आवास और नया प्रधानमंत्री कार्यालय का निर्माण होना है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का दूसरा चरण पूरा
देश के लिए नए संसद भवन का निर्माण सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का हिस्सा है, जो रविवार को उद्घाटन के साथ संपन्न हुआ है। इससे पहले विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक शानदार सेंट्रल विस्टा एवेन्यू को निर्माण के बाद राष्ट्र को समर्पित किया जा चुका है। पहले इसे राजपथ के नाम से जाना जाता था, जिसे अब कर्तव्य पथ कर दिया गया है।
टाटा प्रोजेक्ट को मिला था ठेका
सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट योजना को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन सीपीडब्ल्यूडी की ओर से पूरा कराया जा रहा है। संसद की नई इमारत बनाने का टेंडर टाटा प्रोजेक्ट को 2020 सितंबर में 861 करोड़ रुपए के अनुमानित लागत से दिया गया था। हालांकि, बाद में कुछ संशोधनों की वजह से इसमें थोड़ी सी बढ़ोतरी भी हुई।
24 महीनों में पूरा होगा एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव का निर्माण
वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय, इंडिया हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय का 1,189 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव का निर्माण कर रही है। कंपनी को इसका टेंडर पिछले साल नवंबर में मिला था, जिसका काम 24 महीनों में पूरा होने वाला है।
साउथ ब्लॉक के पास बनेगा एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव
एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव साउथ ब्लॉक के दक्षिण तरफ बनेगा। भविष्य में इंडिया हाउस का इस्तेमाल हैदराबाद हाउस की तरह होगा, जहां मौजूदा समय में दूसरे देशों के नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्तर की उच्च-स्तरीय बातचीत होती है।
कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के निर्माण पर चल रहा है काम
लार्सन एंड टुब्रो कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट की पहली तीन इमारतों का भी निर्माण कर रही है। 2021 के अक्टूबर में इसे 3,142 करोड़ रुपए में इसका ठेका मिला था। इन इमारतों के निर्माण के लिए सीपीडब्ल्यूडी ने ढाई साल की समय-सीमा तय कर रखी है।
सरकार को सालाना 1,000 करोड़ रुपए की होगी बचत
कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के तहत सरकार की योजना 10 इमारतें बनवाने की है, जिसमें विभिन्न मंत्रालय और दफ्तर होंगे। आवास मंत्रालय के मुताबिक विभिन्न सरकारी दफ्तरों के किराए पर सालाना 1,000 करोड़ रुपए खर्च होते हैं, लेकिन कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बन जाने के बाद सरकार के ये सारे पैसे बच जाएंगे।
कुछ पुरानी इमारतों को हटाया जा सकता है
संभावना है कि कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट की सारी इमारतों के निर्माण के लिए शास्त्री भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन और रेल भवन जैसी बिल्डिंगों को गिराया जा सकता है। सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत नॉर्थ और साउथ ब्लॉक जो अभी देश की सत्ता की पहचान है, वह राष्ट्रीय संग्रहालयों में बदल जाएंगे।
एमपी चैंबर का भी होना है निर्माण
संभावना है कि दोनों ब्लॉक आगे चलकर देश के इतिहास और स्वतंत्रता के संघर्ष को प्रदर्शित करेंगे। सरकार की योजना एमपी चैंबर बनाने की भी है, जो कि मौजूदा ट्रांसपोर्ट भवन और श्रम शक्ति भवन की जमीन पर बनाया जाएगा।
डिफेंस एन्क्लेव का भी निर्माण होगा
सरकार एक बड़ा डिफेंस एन्क्लेव का भी निर्माण करवाएगी, जहां रक्षा से जुड़े बड़े अधिकारियों के आवास की व्यवस्था होगी। इस एन्क्लेव के निर्माण के लिए उपराष्ट्रति के मौजूदा निवास और आसपास की इमारतों को भी गिराया जाएगा।
अगले साल (2024) जून तक राष्ट्रीय अभिलेखागार के बगल में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की नई इमारत का निर्माण होगा। वहीं, सेंट्रल कॉन्फ्रेंस सेंटर का निर्माण दिसंबर, 2026 तक होना है। (इनपुट-पीटीआई)












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