New Parliament building: कैसे बदल सकती है विपक्ष के विरोध की तस्वीर? जानिए
New Parliament building:संसद भवन की नई इमारत में काफी कुछ बदली-बदली नजर आएगी। इसका असर कार्यवाही के दौरान भी दिख सकता है और स्थगन की संख्या भी घटने की उम्मीद है।

संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों का हाथों में तख्तियां लेकर आसन के नजदीक वेल तक पहुंचने की तस्वीरें आज के दिन सामान्य हो चली हैं। संसद टीवी से कार्यवाही के लाइव टेलीकास्ट की वजह से उनके विरोध प्रदर्शन का मकसद भी पूरा हो जाता है। लेकिन, 28 मई को जिस नए संसद भवन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन करने जा रहे हैं, उसमें विपक्ष के सामने चुनौती आ सकती है।
बदल सकती है विपक्ष के विरोध की तस्वीर
दरअसल, नई संसद के दोनों सदनों- लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति का आसन पुरानी संसद की तुलना में काफी ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। अब वेल की तुलना में आसन और भी ऊंचा हो जाएगा तो विपक्ष को विरोध की तस्वीर को प्रसारित करवाने में दिक्कत हो सकती है।
वेल से आसन की ऊंचाई काफी बढ़ी
वैसे भी वेल सांसदों की पहली कतार वाली सीटों के मुकाबले लगभग एक फुट गहराई में होती है। यह वह जगह होती है, जहां आसन के ठीक नीचे और सांसदों के सामने दोनों सदनों में सचिवालयों के अधिकारी कार्यवाही के दौरान मौजूद होते हैं।
कार्यवाही बाधित होने के मामले घटने के आसार
संसद की कार्यवाहियों को नजदीक से देखते रहे लोगों का मानना है कि इस बदलाव की वजह से नई संसद में बार-बार स्थगन और कार्यवाही बाधित होने की घटनाएं कम हो सकती है। इसके अलावा नई संसद में जो कैमरे लगाए गए हैं, उनकी नजर भी व्यापक है और पुराने संसद भवन के मुकाबले संख्या भी कहीं ज्यादा है।
लाइव टेलीकास्ट में भेदभाव की शिकायत करता है विपक्ष
कैमरों की संख्या बढ़ने से कंट्रोल रूम में बैठे ऑपरेटरों के लिए भी अब फोकस का विकल्प ज्यादा होगा। पिछले कुछ समय से विपक्षी सांसदों की ओर से यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि उनके विरोध के दौरान संसद टीवी सिर्फ आसन को ही दिखाता रहता है और उनके प्रदर्शन को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इन महान हस्तियों की मूर्तियों को भी मिल सकती है जगह
जानकारी के मुताबिक संसद की नई इमारत में भारत की कई महान हस्तियों की ग्रेनाइट की मूर्तियां भी स्थापित होने की संभावना है। इनमें महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर, सरदार पटेल और चाणक्य आदि शामिल हो सकते हैं।
नई संसद की कुछ खास विशेषताएं
संसद की नई इमारत का बिल्ट-अप एरिया करीब 65,000 वर्ग मीटर है। इसे तिकोने आकार में बनाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि जगह का उत्तम इस्तेमाल हो सके। नए संसद भवन के निर्माण में 26,045 मीट्रिक टन लोहे, 63,807 मीट्रिक टन सीमेंट और 9,689 क्यूबिक मीटर फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है। साथ ही साथ इसके निर्माण में 23,04,095 मानव दिवस के बराबर रोजगार का सृजन हुआ है।
करीब 20 विपक्षी दल उद्घाटन समारोह का कर रहे हैं बहिष्कार
गौरतलब है कि जहां 20 विरोधी दलों ने नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों करवाने की मांग को लेकर इस समारोह के बहिष्कार का ऐलान कर रखा है। वहीं, एनडीए के अलावा कुछ विपक्षी दल भी हैं, जो इसमें शिरकत करने की घोषणा कर चुके हैं।
अबतक पांच विरोधी दल समारोह में शामिल होने को तैयार
जिन विरोधी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनने का ऐलान किया है, उनमें बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और तेलुगू देशम पार्टी शामिल हैं।












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