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Explained: किस जुर्म के लिए अब कौन सी धारा लगेगी? किसे माना जाएगा आतंकवाद? नए आपराधिक कानूनों की पूरी डिटेल

New Criminal Laws in India 2024: 1 जुलाई, 2024 (सोमवार) से देश में आपराधिक न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव लागू हो गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) अमल में आ चुका है।

इसके साथ ही अंग्रेजों के जमाने वाला आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट के दिन गुजर गए हैं। सोमवार से सारे एफआईआर BNS के प्रावधानों के तहत दर्ज होंगे। हालांकि, 1 जुलाई, 2024 से पहले दर्ज सभी मुकदमों की कार्रवाई आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत ही चलेगी और उसी के तहत अंतिम अंजाम तक पहुंचा जाएगा।

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कितना बदल गया कानून?

  • आईपीसी में 511 धाराएं थीं, बीएनएस में सिर्फ 358 धाराएं हैं।
  • बीएनएस में आईपीसी की तुलना में 21 नए अपराध शामिल किए गए हैं।
  • बीएनएस में 41 अपराधों में कैद की अवधि बढ़ाई गई है।
  • 82 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है।
  • 25 अपराधों में न्यूनतम दंड लागू किए गए हैं।
  • 6 अपराधों में जुर्माने के तौर पर सामुदायिक सेवा की शुरुआत की गई है।
  • 19 धाराएं हटा दी गई हैं।

किस जुर्म के लिए अब कौन सी धारा लगेगी?

  • हत्या (आईपीसी 302)- बीएनएस 103
  • हत्या की कोशिश (आईपीसी 307)- बीएनएस 109
  • गैर-इरादतन हत्या (आईपीसी 304)-बीएनएस 105
  • लापरवाही से मौत (आईपीसी 304ए)- बीएनएस106
  • रेप और गैंगरेप (आईपीसी 375,376)- बीएनएस 63,64,70
  • देश के खिलाफ युद्ध (आईपीसी 121,121ए)- बीएनएस 147,148
  • मानहानि (आईपीसी 499,500)- बीएनएस 356
  • छेड़छाड़ (आईपीसी 354)- बीएनएस 74
  • दहेज हत्या (आईपीसी 304बी)- बीएनएस 80
  • दहेज प्रताड़ना (आईपीसी 498ए)- बीएनएस 85
  • चोरी (आईपीसी 379)- बीएनएस 303
  • लूट (आईपीसी 392)- बीएनएस 309
  • डकैती (आईपीसी 395)- बीएनएस 310
  • देशद्रोह (भारत की एकता-अखंडता को खतरे में डालने पर) (आईपसी 124)- बीएनएस 152 (राजद्रोह का अपराध समाप्त किया गया)
  • धोखाधड़ी या ठगी (आईपीसी 420)- बीएनएस 318
  • गैर कानूनी सभा या निषेधाज्ञा (आईपीसी 144)- बीएनएस 187

संगठित अपराध
गंभीर संगठित अपराध के लिए बीएनएस की धारा 111 में प्रावधान किया गया है। इसके तहत अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरन वसूली, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, मानव तस्करी, ड्रग्स, हथियार समेत कोई भी गैरकानूनी गतिविधि।

गंभीर संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 3 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है या मौत की सजा भी दी जा सकती है।

मॉब लिंचिंग के लिए नई धारा
आईपीसी में मॉब लिंचिंग जैसे अपराध के लिए अलग से धारा नहीं थी। बीएनएस 103 (2) में इसे अलग से परिभाषित किया गया है। इस अपराध में अब उम्रकैद से लेकर मौत तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

छीना-झपटी या झपटमारी के लिए नई धारा
झपटमारी के लिए बीएनएस की धारा 302 का प्रावधान है। यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा।

किसे माना जाएगा आतंकवाद?
बीएनएस में आतंकवाद की विस्तृत परिभाषा बीएनएस की धारा-113 में दी गई है। आईपीसी में आतंकवाद परिभाषित नहीं था। भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, एकता, अखंडता और आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने पर इसे आतंकवाद माना जाएगा।

इस वजह से अब नकली करेंसी का कारोबार और उसकी तस्करी के अपराधों में आतंकवाद की धारा लगेगी। अगर किसी व्यक्ति को मालूम हो कि उसके कब्जे में जो संपत्ति है, वह आतंकी करतूतों से जुटाई गई है तो उसे आतंकी कृत्य में शामिल माना जाएगा।

आतंकवाद के लिए सजा का क्या प्रावधान है?
बीएनएस के तहत आतंकवादी कार्रवाई में किसी की मृत्यु होने पर मौत से लेकर उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान है। आतंकवादी साजिश रचने या आतंकियों की मदद करने के लिए पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान।

आतंकवादी संगठनों से जुड़ने पर उम्रकैद और जुर्माना। आतंकवादी को छिपाने पर तीन साल तक की सजा से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आमलोगों के लिए नए आपराधिक कानूनों के बाद बदलाव
हत्या, लूट, रेप समेत तमाम एफआईआर ऑनलाइन दर्ज होगी। थानों के चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा।

अपराध कहीं हुआ हो, दूसरे जिले में भी जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जा सकेगी। थाने और जिले का हवाला देकर टरकाने वाले पुलिसिया हथकंडे अब खत्म होंगे।

फरियादी को एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई के सारे अपडेट मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से पहुंचेगी।

झूठे वादे करके शारीरिक संबंध बनाने पर बीएनएस की धारा 69 के तहत सजा का प्रावधान है। दुष्कर्म के मामले में न्यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान।

गैंगरेप के मामले में 20 साल की कैद से लेकर मौत (नाबालिग से दुष्कर्म) की सजा तक का प्रावधान।

महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले में पीड़िता की इच्छा वाली जगह पर पुलिस को बयान दर्ज करना होगा।

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