कालापानी में नेपाल को जनगणना नहीं कराने देंगे, स्थानीय लोग बोले-हम भारत के नागरिक
नई दिल्ली। नेपाल ने जून में एक विवादित नक्शा पास किया है। इस नक्शे में नेपाल ने भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है। अब नेपाल ने कालापानी में जनगणना कराने की भी बात कही है। हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि इसकी इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। वहीं कालापानी एरिया में रहने वाले लोगों ने भी इस पर एतराज किया है और साफ कर दिया है कि हम भारत के नागरिक हैं ना कि नेपाल के।

हम भारत के नागरिक, नेपाल को नहीं देंगे कोई जानकारी
कालापानी क्षेत्र के ग्रामीणों का नेपाल के जनगणना कराने को लेकर कहना है कि नेपाल अगर कोई भी जनगणना कराएगा तो ऐसे किसी भी अभ्यास में भाग लेने का कोई सवाल ही नहीं है। लोगों का साफ कहना है कि हम भारत के नागरिक हैं। ऐसे में हम नेपाली सरकार की ओर से कराए जा रही जनगणना में भाग क्यों लेंगे।

नेपाल की टीम को नहीं देंगे परमिशन
नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि अगर नेपाल की इस तरह की कोई योजना है, तो यह कभी भी सफल नहीं हो सकती क्योंकि किसी भी नेपाली टीम को इस तरह के अभ्यास के लिए क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में नेपाल के लिए ये संभव नहीं होगा।

नेपाल में 28 मई से जनगणना
नेपाल में अगले साल 28 मई से 12वीं जनगणना शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए सरकारी स्तर पर योजना भी तैयार कर ली गई है। नेपाल कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा में भी जनगणना कराना चाहता है। नेपाल की राष्ट्रीय योजना आयोग और उसके केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि ये तीनों क्षेत्र उसके देश के अंग हैं। लिहाजा अगले साल होने वाली जनगणना इन क्षेत्रों में भी की जाएगी। उनका यह भी आरोप है कि भारत ने इन तीनों क्षेत्रों पर जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। मिन बहादुर शाही ने काठमांडू पोस्ट से बातचीत में दावा किया कि हम कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा में निश्चित रूप से जनगणना करेंगे।












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