आठ दिन के नवजात को लीवर कैंसर, तीन महीने तक जिंदगी-मौत की लड़ाई में जीता कौन ?
नेपाल में नवजात को कैंसर का मामला सामने आने के बाद डॉक्टरों ने तीन महीने तक उसका इलाज किया। अब बच्चा कैंसर मुक्त हो गया है। nepal infant cancer treatment three months therapy
काठमांडू, 17 सितंबर : चिकित्सा में चमत्कार जैसी बातें कई बार चौंकाती हैं, लेकिन कुछ मामले ऐसे होते हैं जिन्हें देखने-सुनने के बाद यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है। पड़ोसी मुल्क नेपाल से ऐसा ही मामला सामने आया जहां नवजात को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हुई। कमाल की बात ये कि नवजात ने कैंसर से तीन महीनों तक लड़ाई लड़ी और चमत्कार हुआ। जानिए तीन महीनों तक कैंसर से लड़ाई के बाद जीत किसकी हुई।

लीवर ट्यूमर में दुर्लभ कैंसर
नेपाल के एक शिशु को जन्म के केवल आठ दिन बाद जानलेवा बीमारी का पता लगा। घातक लीवर ट्यूमर में दुर्लभ कैंसर डिटेक्ट हुआ।

डॉक्टरों का दिलेरी भरा फैसला
डॉक्टरों ने इतनी कम उम्र की बच्ची को कीमोथेरेपी देने का फैसला लिया। छह राउंड की कीमोथेरेपी और दुधमुंहे नवजात का ऑपरेशन करने का दिलेरी भरा फैसला लिया गया।

नवजात हेपेटोब्लास्टोमा से पीड़ित
डॉक्टरों ने शुक्रवार को कहा, बच्चा अब तीन महीने का है। उसे हेपेटोब्लास्टोमा (hepatoblastoma) से पीड़ित पाया गया था। यह एक दुर्लभ ट्यूमर है जो लीवर की कोशिकाओं में पनपता है।

नवजात बच्चों में कैंसर, डॉक्टरों की राय
नवजात को बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने कहा कि बचपन में कैंसर वाले लीवर ट्यूमर लगभग 1.2 मिलियन बच्चों में एक को होता है। हालांकि, जन्मजात हेपेटोब्लास्टोमा दुर्लभ है।

नवजात के इलाज के लिए कीमोथेरेपी
फोर्टिस हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और बीएमटी विभाग में प्रमुख निदेशक डॉ विकास दुआ के नेतृत्व वाली डॉक्टरों की टीम ने नवजात के इलाज के लिए कीमोथेरेपी का फैसला लिया। छह राउंड कीमोथेरेपी और सर्जिकल रिसेक्शन (surgical resection) से नवजात का ट्रीटमेंट किया गया।

प्रसवपूर्व स्कैन में डिटेक्ट हुआ लीवर में ठोस पदार्थ
नवजात को दुर्लभ कैंसर पर दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के लीवर में ठोस चीज थी (solid mass)। संयोग से इसे प्रसवपूर्व स्कैन में डिटेक्ट कर लिया गया था। हालांकि, बच्चे के नवजात होने के कारण ये चैलेंजिंग केस था, लेकिन इस दुधमुंहे बच्चे ने कीमोथेरेपी अच्छी तरह से बर्दाश्त किया।

तीन महीने की जंग, नवजात कैंसर मुक्त
डॉक्टरों के मुताबिक प्रसूता की अल्ट्रासोनोग्राफी से पता चला कि बच्चे के लीवर के दो हिस्सों में ट्यूमर था। डॉक्टरों ने कहा कि कीमोथेरेपी तुरंत शुरू की गई। उसके बाद सर्जरी की गई। कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाए, इसके लिए कीमोथेरेपी के कुछ और चक्र शुरू किए गए। तीन महीनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और नवजात को कैंसर मुक्त घोषित किया गया।












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