India-Nepal border row: इस बार नेपालियों को नहीं मिलेगा बंगाल के अनानास का स्वाद
नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच जारी सीमा विवाद की वजह से अब नेपाली लोगों को अनानास का स्वाद चखने को नहीं मिलेगा। अब आप सोच रहे होंगे कि सीमा विवाद का अनानास से क्या लेना-देना, तो आपको बता दें कि नेपाल ने पिछले दिनों अपना जो नक्शा बदला है उसकी वजह से नॉर्थ बंगाल के लोग कुछ नाराज हैं। अब उत्तर बंगाल के अनानास व्यापारिक संघ की तरफ से यह फैसला लिया गया है कि नेपाल को यहां से होने वाला अनानास का निर्यात नहीं किया जाएगा।

नेपाल का फैसला संघ को मंजूर नहीं
संघ ने नेपाल के नए नक्श्ो को मानने से इनकार कर दिया है। नेपाल ने पिछले दिनों जो नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है उसमें उसने उत्तराखंड के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपनी सीमा में दिखा दिया है। भारत की तरफ से भी इस नए नक्शे के साथ इन हिस्सों पर नेपाल के दावे को मानने से साफ इनकार कर दिया गया है। अनानास व्यापारिक संघ की मुखिया काजल घोष ने अखबार द टेलीग्राफ के साथ बातचीत में कहा है, 'भारत और नेपाल के बीच दशकों से दोस्ताना संबंध रहे हैं लेकिन नेपान ने हाल ही में भारत के इनकार के बाद भी कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जो नागवार हैं। ऐसे में हमने फैसला किया है कि हम इस बार नेपाल को अनानास नहीं भेजेंगे।'

620,000 टन अनानास की खेती
उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग हिस्से में आने वाले बिधाननगर में अनानास की खेती होती है। साथ ही इस्लामपुर के तहत आने वाले नॉर्थ दिनजापुर में भी अनानास की खेती की जाती है। नॉर्थ बंगाल के 20,000 हेक्टेयर भूमि पर इस फल की खेती की जाती है। हर वर्ष यहां पर करीब 620,000 टन अनानास उगाए जाते हैं। करीब एक लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर खेती से जुड़े हुए हैं। हर वर्ष जुलाई से अगस्त माह के अंत तक इस फल का निर्यात नेपाल को किया जाता है।

3,000 टन अनानास का निर्यात
नॉर्थ बंगाल से अनानास बंगाल के बाकी हिस्सों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को भी भेजे जाते हैं। अनानास व्यापारिक संघ के कुछ वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि करीब 3,000 टन अनानास हर वर्ष नेपाल को भेजे जाते हैं। रोजाना नेपाल को करीब 25,000 पीस यानी 50 टन अनानास का निर्यात किया जाता है।

भारत में कम कीमत पर बेच लेंगे अनानास
अनानास उगाने वाले किसानों और उत्पादकों के संगठन के सेक्रेटरी रंजन घोष ने कहा है कि इस फैसले के बाद भारत में कम कीमत पर फल को बेचना पड़ेगा। लेकिन इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। उत्पादकों की तरफ से भी यह अपील की गई है कि बिधाननगर स्थित अनानास विकास और अनुसंधान केंद्र को चालू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी डेवलपमेंट अथारिटी की तरफ से करीब एक दशक पहले शुरू किया गया था लेकिन अभी तक यह अमल में ही नहीं लाया गया है।












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