कुश्ती-कबड्डी छोड़कर नीरज चोपड़ा ने क्यों थामा जैवलीन, आसान नहीं था सफर
नई दिल्ली। जब 23 साल के भारतीय ने टोक्यो ओलंपिक में जैवलीन फेंका, तो किसी को नहीं पता था कि ये लड़का इतिहास रच देगा। जैवलीन थ्रो में देश को पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाले 135 करोड़ भारतीय का सीना गर्व से ऊंचा करने वाले नीरज चोपड़ा आज देश के सुपरस्टार है। देश को ट्रैक एंड फिल्ड में पहली बार ओलंपिक गोल्ड दिलाने वाले नीरज स्वभाव से बेहद सरल और शांत है। ओलंपिक से लौटने के बाद वो लगातार व्यस्त है, लेकिन समय निकालकर उन्होंने वनइंडिया के साथ खास बातचीत की और कई राज खोले।

हरियाणा के छोटे से गांव के नीरज बचपन में गोल मटोल थे, वजन ज्यादा था तो चाचा ने उन्हें स्टेडियम ले जाना शुरू किया, ताकि कुछ भागदौड़ हो सके और उनका वजन कंट्रोल हो जाए। नीरज जब बचपन में कुत्ता पायजामा पहनकर निकलते थे तो लोग सरपंच कहकर बुलाते थे। बचपन में जिस स्टेडियम का रूख उन्होंने वजन कम करने के लिए किया आज वो सितारा बन गया है। हरियाणा में अधिकांश घरों में बच्चे कुश्ती और कबड्डी खेलते हैं। नीरज की शुरुआत भी इसी से हुई, लेकिन ये खेल उन्हें कुछ जमा नहीं। स्टेडियम में उनके साथ जय चौधरी ने उन्हें पहले बातों-बातों में भाला फेंकने को कहा, लेकिन उनका थ्रो देखकर जय समझ गए थे कि ये लड़का एक दिन बड़ा नाम करेगा।
जय चौधरी की सलाह पर नीरज ने जैवलीन को अपने हाथों में थामा और कड़ी मेहनत और लगातार ट्रेनिंग से आज वो जैलवीन थ्रो में ओलंपिक गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं। नीरज 10 सालों से ही अपने बांल लंबे रखते थे, लेकिन ओलंपिक में कोई चांस नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने बाल भी कटवा लिए। जब बात ओलंपिक की थी तो कोई कैसे चांस ले सकता है। सालों तक खुद को फोन से दूर कर लिया। मां की याद आती तो खुद वीडियो कॉल कर मां और घरवालों से बात कर लेते थे। उनका ये त्याग और उनकी जीत में बदल गया है।
यह भी पढ़ें: नीरज चोपड़ा CM खट्टर से मिले, बोले- अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीतना है, सरकार ने दिया ये ऑफर
नीरज ने बातचीत के दौरान बताया कि जब ओलंपिक में 13 सालों के बाद राष्ट्रगान बजा तो वो बेहद भावुक हो उठे थे। सिर गर्व से ऊंचा था और दिल भावुक हो रहा था। नीरज ने अपना मेडल अपने आदर्श रहे महान खिलाड़ी मिल्खा सिंह को समर्पित किया। वो चाहते थे कि उन्हें खुद मिलकर वो मेडल दिखाएं, लेकिन ऐसा हो न सका। मिल्खा सिंह ने बेटे ने भी नीरज के गोल्ड मेडल जीतने पर कहा था कि आज पिताजी ऊंपर से उन्हें देखकर खुशी से रो रहे होंगे ।
नीरज और 135 करोड़ लोगों के दिलों में बसे है। जिस गेम को नीरज से चुना उनके पिता भी उस जैवलीन के बारे में नहीं जानते थे, लेकिन बेटे ने अपनी कठिन ट्रेनिंग के बल पर पहली ही बार में ओलंपिक का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया गया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज पर इनामों की बौछार कर दी गई, लेकिन उनके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया है। नीरज यहीं नहीं रूके हैं, उन्होंने अपने सफर के आगे का रास्ता तय कर लिया है। शादी और गर्लफ्रेंड जैसे सवालों पर बचते हुए नीरज अपना पूरा फोकस गेम पर लेने में जुट गए हैं।












Click it and Unblock the Notifications