लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में हुए 600 सांप्रदायिक दंगे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह नाकामयाब रही है। आए दिन यूपी में सांप्रदायिक दंगों की खबरे आती रहती है। मुजफ्फरनदर का बवाल समाप्त भी नहीं हुआ था कि सहारनपुर जलने लगा। आंकड़े बस इतने ही नहीं है। लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में करीब 600 से ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं हुई है।
जी हां भले ही आंकड़े चौकाने वाले है, लकिन सच्चाई है कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के बाद से यूपी में दंगे ज्यादा हुए है। चुनाव परिणाम के बाद यहां 605 दंगे हुए। जिसमें से करीब 60 फीसद मामले ऐसी विधानसभा क्षेत्रों के सामने आए हैं जहां पर अगले कुछ माह में उपचुनाव होने हैं। गौरतलब है कि आने वाले समय में बारह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में हुए सांप्रदायिक दंगों में से करीब दो तिहाई मामले ऐसे हैं जहां पर बवाल की वजह धर्म को बनाया गया।

सीएम हैं चुप
अखबार ने पुलिस रिकार्ड की पड़ताल के बाद दावा करते हुए लिखा है कि यूपी में भाजपा, सपा और बसपा, तीनों ही दलों ने दो समुदायों के व्यक्तिगत झगड़ों को सांप्रदायिक तनाव में तब्दील करने की कोशिश की।

यूपी पुलिस की चुप्पी
रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनावों की घोषणा के बाद 16 मई से 25 जुलाई के बीच 605 झड़पें हुई हैं। ये झड़पें मामूली स्तर की थीं लेकिन पुलिस ने ने इन्हें मामूली माना था।

जबाव दें अखिलेश यादव
यूपी में हुए सांप्रदायिक दंगों के आंकड़े बताते हैं कि कहीं मस्जिद बनाने, दीवार ढहाने, कब्रिस्तान, मदरसा और लाउड स्पीकर जैसे विवादों मामूली झड़प से उग्र होते चले गए। लोकसभा चुनाव के बाद अकेले पश्चिमी यूपी में इस तरह के 259 मामले सामने आए। वहीं बुंदेलखंड में छह, पूर्वी यूपी 16, अवध में 53 और तराई क्षेत्र में 29 मामले सामने आए हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद बढ़े दंगे
पांच विधानसभा सीटें-सहारनपुर नागर, बिजनौर, कैराना, ठाकुरवाड़ा और गौतमबुद्धनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद सबसे अधिक 259 सांप्रदायिक झड़पें हुई हैं।

रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक 6 कारणों की वजह से सांप्रदायिक झड़प हुई। जिनमें सबसे अधिक झड़प मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान के निर्माण या लाउड स्पीकर के प्रयोग के कारण हुई।

मामूली विवाद से दंगे तक बढ़ी बात
जबकि 70 मामलों में जमीन विवाद के कारण झड़प हुईं है। 61 झड़पें गौहत्या के कथित आरोप में हुईं। वहीं लड़की भगाने, लड़की छेड़ने और महिलओं या पुरुषों के शोषण के कारण 50 मामले हुए। 30 मामलों में मामूली दुर्घटनाओं के कारण सांप्रदायिक तनाव हुआ।

कहा भरोसे के लायक नहीं हैं आंकड़े
समाजवादी पार्टी इस रिपोर्ट को नकारते हुए कहा कि प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में सांप्रदायिक तनाव की कई घटनाएं हुई हैं लेकिन 600 का आंकड़ा भरोसे लायक नहीं है।












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