भारत बांग्लादेश में तनाव जारी, हिंदुओं-ईसाइयों पर 2200 हमले, महफुज आलम के बयान पर भी दर्ज किया विरोध

India Bangladesh Relations: भारत ने बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार महफुज आलम द्वारा किए गए विवादास्पद बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेश सरकार से इस मामले में "मजबूत विरोध" दर्ज कराया और कहा कि सभी नेताओं को सार्वजनिक बयानों में जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बयान में कहा, "हमने इस मुद्दे पर बांग्लादेश पक्ष के साथ अपना विरोध दर्ज कराया है।

उन्होंने कहा कि यह समझ में आया है कि उक्त पोस्ट हटा ली गई है, लेकिन हम फिर भी सभी संबंधित पक्षों को याद दिलाना चाहते हैं कि उन्हें अपने सार्वजनिक बयान में सतर्कता बरतनी चाहिए। भारत ने हमेशा बांग्लादेश के लोगों और अंतरिम सरकार के साथ रिश्ते बढ़ाने की इच्छा जताई है, लेकिन इस तरह की टिप्पणियाँ जिम्मेदारी की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।"

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महफुज आलम ने एक अब डिलीट हो चुके फेसबुक पोस्ट में कहा था कि भारत को उस जन आंदोलन को पहचानना चाहिए, जिसने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, हसीना को सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ हिंसक विरोधों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने ढाका से भागकर सैन्य विमान से देश छोड़ दिया था। इस घटना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा किया है।

2024 में बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़े हमले

इधर विदेश मामलों के राज्य मंत्री किर्ती वर्धन सिंह ने मंगलवार को संसद में बताया कि 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2200 हमले दर्ज किए गए। वहीं, पाकिस्तान में ऐसी घटनाओं की संख्या 112 रही। ये आंकड़े दोनों देशों में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति को लेकर भारत सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।

संसद में दिए गए बयान में किर्ती वर्धन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों पर धार्मिक हमले जारी हैं। इनमें जबरन धर्मांतरण, मंदिरों को तोड़ने और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी घटनाएं शामिल हैं। 2024 में पाकिस्तान में कुल 112 ऐसे मामले सामने आए हैं, जो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न के रूप में सामने आए।

भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने का संकल्प लिया है।

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हाल ही में तब से तनावपूर्ण हो गए हैं, जब बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। भारत ने बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर चिंता जताई और कहा कि ढाका सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे।

विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में यह टिप्पणी की और कहा कि भारत ने बार-बार बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई है। यह बयान विदेश सचिव विक्रम मिश्री की बांग्लादेश यात्रा के बाद आया, जब उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम प्रशासन के अधिकारियों से इस मुद्दे पर चर्चा की थी।

पाकिस्तान की सार्क से जुड़ी नापाक चाल पर भारत का बड़ा बयान

भारत ने पाकिस्तान के प्रयासों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उसने बांग्लादेश को सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए उकसाया था, ताकि भारत को चिढ़ाया जा सके और पाकिस्तान को एक मंच मिल सके। लेकिन भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सार्क मंच को पुनर्जीवित करने का कोई औचित्य नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "सार्क पिछले कुछ वर्षों से ठंडा पड़ा है और ऐसा क्यों है, यह किसी से छिपा नहीं है। क्षेत्रीय सहयोग के लिए बिम्सटेक जैसे अन्य मंच अधिक प्रभावी और प्रासंगिक हैं।"

इस बयान से पाकिस्तान और बांग्लादेश को बड़ा झटका लगा है, जो सार्क सम्मेलन के जरिए अपनी कूटनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करना चाह रहे थे।

मिस्त्र में यूनुस-शरीफ की मुलाकात और सार्क की चर्चा

19 दिसंबर को मिस्त्र में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई थी, जिसमें सार्क को फिर से सक्रिय करने की बात की गई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश को सुझाव दिया कि वह सार्क सम्मेलन की मेजबानी करे। मोहम्मद यूनुस ने भी इस पर सहमति जताई और दोनों नेताओं ने इसे आगे बढ़ाने की योजना बनाई। पाकिस्तान की मंशा थी कि इस मंच के बहाने वह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत कर सके।

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