कर्नाटक चुनाव : BJP को बड़ा झटका, कांग्रेस के समर्थन में उतरी NCP
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव दिनोंदिन दिलचस्प होता जा रहा है। राज्य में सत्तासीन पार्टी कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे के हर मोर्च पर घेरने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस इस मामले में भाजपा को लागातर पछाड़ने में सफल हो रही है। इस चुनाव में भाजपा के खिलाफ सभी पार्टियां लामबंद हो रही है। राज्य में एनसीपी ने भाजपा के चुनावी समीकरणों को बिगाड़ दिया है। शरद पवार की नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अगले महीने होने वाले कर्नाटक चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। साथ ही सिद्दारमैया सरकार को बिना शर्त समर्थन देने की भी बात कही है। नए समीकरणों के बीच एनसीपी के इस दांव से कांग्रेस फायदा होगा।

कांग्रेस को बिना किसी शर्त के समर्थन
गुरुवार को एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी ने गुरुवार को बताया कि 'कर्नाटक को भाजपा को हराने के लिए हमने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। यही नहीं यह भी फैसला किया गया है कि हम सत्ता पर काबिज कांग्रेस का बिना किसी शर्त के समर्थन करेंगे।' कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को मतदान है और मतगणना 15 मई को होगी। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने तो बीजेपी की तरफ से अमित शाह ने मोर्चा संभाला हुआ है। अब तक ये दोनों नेता राज्य के कई दौरे कर चुके हैं।

कांग्रेस ने दोबारा सीएम सिद्धारमैया पर दांव खेला
कर्नाटक में 5 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए कोशिश कर रही भाजपा ने येदियुरप्पा को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। उन्हें शिकारीपुरा से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं कांग्रेस ने दोबारा सीएम सिद्धारमैया पर दांव खेला है। यहीं नहीं चुनाव से ऐन पहले सिद्धारमैया ने लिंगायत और वीरशैव-लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का ऐलान कर बड़ा दांव खेल दिया।

लिंगायत समुदाय के 30 गुरुओं ने सिद्धारमैया का समर्थन किया
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को केंद्र को सिफारिश करने के लिए भी भेज दिया है। लिंगायत समुदाय के 30 प्रभावशाली गुरुओं ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का समर्थन कर दिया है। लिंगायत समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है, बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के लोगों की संख्या करीब 18 प्रतिशत है। कांग्रेस सरकार के इस दांव से बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी यह बड़ा झटका है क्योंकि हाल ही में उन्होंने कर्नाटक के कई मठों में जाकर लिंगायत समुदाय के गुरुओं से मुलाकात की थी।
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