NCERT पर फिर छिड़ी बहस! 9वीं की किताब से 'प्रस्तावना' और 'धर्मनिरपेक्षता' गायब, अब बच्चे पढ़ेंगे इमरजेंसी

NCERT Row Explained Class 9th Textbook: NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। नई किताब में पहली बार 1975 की इमरजेंसी को विस्तार से शामिल किया गया है।

जबकि पहले पढ़ाई जाने वाली किताब में मौजूद संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular) व 'धर्मनिरपेक्षता' (Secularism) जैसे शब्द और उसकी परिभाषा को पूरी तरह हटा दिया गया है। इस बदलाव के बाद राजनीति भी गर्मा गई है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

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क्या बदला है 9वीं की नई किताब में? आसान भाषा में समझिए

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली इस नई किताब का नाम 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 1' रखा गया है। इसने पहले चल रही इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र की अलग-अलग किताबों की जगह ले ली है। यह अब 220 पन्नों की एक ही एकीकृत (Integrated) किताब है।

संविधान की 'प्रस्तावना' और 'धर्मनिरपेक्षता' शब्द हटा

पुरानी किताब में क्या था: पहले की किताब के 'संवैधानिक डिजाइन' चैप्टर में संविधान की 'प्रस्तावना' को केंद्र में रखकर बच्चों को पढ़ाया जाता था। उसमें 'प्रभुत्व संपन्न', 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष', 'लोकतांत्रिक' और 'गणराज्य' जैसे भारी-भरकम शब्दों का मतलब आसान भाषा में समझाया गया था। धर्मनिरपेक्षता को लेकर लिखा था कि 'देश का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होगा और सरकार सभी धर्मों का समान सम्मान करेगी।'

नई किताब में संविधान सभा, संविधान निर्माण और मौलिक अधिकारों पर तो चर्चा है, लेकिन पूरी किताब में 'प्रस्तावना' को छापा ही नहीं गया है। पूरी किताब में कहीं भी 'Secular' (धर्मनिरपेक्ष) शब्द का जिक्र तक नहीं है।

पहली बार 9वीं के कोर्स में आया 'आपातकाल'

पहले आपातकाल का टॉपिक कक्षा 12वीं की राजनीति विज्ञान की किताब में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसे पहली बार कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। किताब के 'चैलेंजेस टू डेमोक्रेटिक प्रैक्टिसेज इन इंडिया' (भारत में लोकतांत्रिक प्रथाओं को चुनौतियां) सेक्शन में आपातकाल को देश के लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट बताया गया है।

किताब में लिखा गया है-"जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया था। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई थी और कई बड़े राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया था। इससे देश के लोकतांत्रिक संस्थान भारी दबाव में आ गए थे और नागरिकों की आजादी छीन ली गई थी।"

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चुनाव आयोग पर भी बदला गया पाठ

सिर्फ संविधान ही नहीं, चुनाव आयोग को लेकर भी किताब की भाषा बदली है। बच्चों को पहले पढ़ाया जाता था कि 'दुनिया के बहुत कम चुनाव आयोगों के पास भारत के चुनाव आयोग जितनी शक्तियां हैं।' इसमें उसकी स्वायत्तता और सरकारों द्वारा उसकी बात मानने की मजबूरी पर जोर था।

अब नई किताब में इन भारी-भरकम तारीफों को हटाकर केवल चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों, जिम्मेदारियों और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने की उसकी आधिकारिक भूमिका पर फोकस किया गया है।

बदलाव पर छिड़ी रार: कौन क्या बोला?

NCERT के इस कदम के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए इस फैसले का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा-"NCERT ने जो किया है, वह बिल्कुल सही है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह पता होना चाहिए और उन्हें समझना चाहिए कि आपातकाल के दौरान देश में क्या काले कारनामे हुए थे और कैसे लोकतंत्र की हत्या की गई थी।"

विपक्ष का पलटवार: "इतिहास को अपने तरीके से मरोड़ रही है BJP"

कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा-"मैंने देखा है कि जब भी केंद्र या राज्यों में बीजेपी की सरकार आती है, उनका पहला काम किताबों, इतिहास और साहित्य को अपने राजनीतिक चश्मे से दिखाना होता है। यह उनका अजेंडा हो सकता है, लेकिन हमें आगे देखना चाहिए। आज देश का लोकतंत्र जिस खतरे का सामना कर रहा है, वैसा इतिहास में कभी नहीं हुआ।"

वहीं, शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने इंदिरा गांधी का बचाव करते हुए कहा कि आपातकाल लगाना कोई असंवैधानिक काम नहीं था, बल्कि खुद संविधान में प्रधानमंत्री को यह अधिकार दिया गया है कि अगर देश में अराजकता फैले तो आपातकाल लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि इंदिरा जी ने संविधान का सम्मान नहीं किया।

क्यों चर्चा में है यह बदलाव?

नई किताब में इमरजेंसी को शामिल करना और प्रस्तावना व धर्मनिरपेक्षता जैसे विषयों को हटाना सिर्फ शैक्षणिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि किताब जारी होते ही देशभर में इस पर बहस शुरू हो गई है।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में NCERT इन बदलावों को लेकर कोई स्पष्टीकरण देता है या नहीं, लेकिन फिलहाल नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब चर्चा और विवाद दोनों के केंद्र में आ गई है।

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