NCERT Controversy: न्यायपालिका टिप्पणी विवाद में NCERT बैकफुट पर, कोर्ट में मांगी बिना शर्त माफी

NCERT Judiciary Controversy: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को लेकर छपे विवादित अध्याय पर मंगलवार, 10 मार्च को बिना शर्त और पूर्ण रूप से माफी मांग ली है। भारी विवाद और सुप्रीम कोर्ट की तीखी फटकार के बाद, परिषद ने घोषणा की है कि संबंधित पूरी किताब को बाजार और डिजिटल प्लेटफॉर्म से वापस ले लिया गया है।

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Supreme Court से NCERT ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए अपनी गलती स्वीकार की। परिषद ने कहा, "निदेशक और NCERT के सदस्य उक्त अध्याय IV के लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं। पूरी किताब वापस ले ली गई है और अब यह उपलब्ध नहीं है।" परिषद ने यह भी दोहराया कि वे शैक्षिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को पत्र लिखकर सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से इस विवादित पाठ्यपुस्तक को हटाने के निर्देश दिए हैं।

NCERT की किताब को लेकर क्या है पूरा विवाद?

विवाद की जड़ NCERT द्वारा हाल ही में प्रकाशित कक्षा 8 (भाग-II) की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' (Exploring Society: India and Beyond) है। इस किताब के चौथे अध्याय, जिसका शीर्षक 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' (The Role of Judiciary in our Society) था, में भारतीय न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों का जिक्र किया गया था।

चैप्टर में न्यायिक प्रणाली की समस्याओं को भ्रष्टाचार, लंबित मामलों के भारी बोझ और जजों की कमी से जोड़कर दिखाया गया था। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के उल्लेख ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा की, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत को भी नाराज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए इस किताब के पब्लिकेशल और डिजिटल प्रसार पर पूरी तरह बैन लगा दिया था। अदालत ने किताब की सामग्री को अपमानजनक करार दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था-"एक गोली चलाई गई है और संस्था (न्यायपालिका) लहूलुहान है। यह न्यायपालिका को बदनाम करने की एक गहरी साजिश है। यह मामला सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों तक भी पहुंचेगा।"

CJI ने इस मामले की गहन जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि वे इस कार्यवाही को इतनी आसानी से बंद नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "संस्था के प्रमुख के रूप में मुझे पता लगाना होगा कि इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।"

सिर्फ माफी काफी नहीं-दोषियों पर गिरेगी गाज

अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस अध्याय को तैयार करने में शामिल दो व्यक्तियों को मंत्रालय के साथ उनके पदों से हटा दिया गया है। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने इसे "बेहद हल्की कार्रवाई" करार दिया और मामले की तह तक जाने की बात कही।

फिलहाल, NCERT इस पूरी किताब को नए सिरे से संशोधित करने या वैकल्पिक सामग्री उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन इस घटना ने स्कूली शिक्षा में कंटेंट की निगरानी और न्यायिक सम्मान जैसे विषयों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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