Muharram 2026: आशूरा का रोजा आज, क्या है दिल्ली,यूपी, बिहार और मुंबई में इफ्तार का सही समय?
Muharram 2026: आज यौम-ए-आशूरा है, इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम चार पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। मुहर्रम की 10वीं तारीख को आशूरा होता है, जो कि बलिदान, प्रेम और इंसानियत का प्रतीक है, शिया मुसलमानों के लिए आशूरा, इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद का दिन है।
आज वे कर्बला में हुई ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए मातम और मजलिस आयोजित करते हैं तो वहीं सुन्नी लोग इस महीने के 9वें-10वें और 11वें दिन मुहर्रम का रोजा रखते हैं।

आशूरा के दिन क्या-क्या होता है?
- पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं।
- नफ़्ल इबादत, तिलावत और दुआ करते हैं।
- शिया समुदाय कर्बला की शहादत को याद करते हुए मजलिस और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है।
- सुन्नी लोग रोजा रखते हैं और इसमें सहरी- इफ्तार रमजान माह की तरह ही होता है।
आशूरा का संदेश
आशूरा का दिन सत्य, न्याय, धैर्य, त्याग और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। इमाम हुसैन की कुर्बानी को पूरी दुनिया में साहस और इंसाफ की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

क्या है दिल्ली,यूपी, बिहार और मुंबई में इफ्तार का सही समय?
- दिल्ली में इफ्तार का वक्त: शाम 07:25 बजे
- लखनऊ में इफ्तार का वक्त: शाम 07:15 बजे
- पटना में इफ्तार का वक्त: शाम 06:43 बजे
- मुंबई में इफ्तार का वक्त: शाम 07:20 बजे
- बेंगलुरु में इफ्तार का वक्त: शाम 06:20 बजे
- चेन्नई में इफ्तार का वक्त: शाम 06:28 बजे
- बनारस में इफ्तार का वक्त: शाम 07:20 बजे
क्यों खास माना जाता है आशूरा का रोजा?
इस दिन के बारे में माना जाता है कि अल्लाह ने हजरत मूसा (Alayhi salam) और उनकी कौम को फिरौन के अत्याचारों से मुक्ति प्रदान की थी. इसी खुशी और शुक्राने के रूप में रोजा रखने की परंपरा शुरू हुई। सुन्नी मुस्लिम समुदाय में आशूरा के रोजे को विशेष पुण्य और बरकत वाला माना जाता है, कहते हैं जो भी आज रोज रखता है , खुदा उसके सारे गुनाहों को माफ कर देता है।
आशूरा के दिन क्या करें और क्या न करें?
क्या करें: आशूरा के दिन पांचों वक्त की नमाज अदा करें, कुरआन की तिलावत करें, दुआ करें, जरूरतमंदों की मदद करें, दान-पुण्य करें और शांति, धैर्य तथा इंसाफ का संदेश अपनाएं।
क्या न करें: इस दिन धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा, विवाद या नफरत फैलाने से बचें। सोशल मीडिया पर अपुष्ट धार्मिक संदेश या अफवाहें साझा न करें। दिखावे के लिए इबादत न करें और ऐसी किसी विशेष नमाज या रस्म को अनिवार्य न मानें, जिसका उल्लेख प्रामाणिक इस्लामी स्रोतों में नहीं मिलता। साथ ही स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।














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