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Nawab Malik पर महाराष्ट्र की राजनीति में रार, NCP का दोनों गुट क्यों है लपकने को तैयार?

महाराष्ट्र के सताधारी गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना-एनवीसी-अजित पवार) में नवाब मलिक को शामिल करने को लेकर सवाल उठ रहे थे कि इसमें एनसीपी का विपक्षी खेमा भी कूद पड़ा है। शरद पवार गुट की सांसद और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने कहा है कि बीजेपी ने नवाब मलिक के साथ गलत किया।

दरअसल, गुरुवार को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दूसरे डिप्टी सीएम अजित पवार को चिट्ठी लिखकर एनसीपी विधायक नवाब मलिक को सत्ताधारी महायुति गठबंधन का हिस्सा बनाने पर ऐतराज जताया था। नवाब मलिक केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की वजह से ही जेल में थे।

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हम नवाब मलिक के साथ खड़े हैं- सुप्रिया सुले
अब एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है, 'नवाब मलिक के साथ बीजेपी ने किया वह गलत है...नवाब मलिक ड्रग माफिया के खिलाफ लड़े। बीजेपी भ्रष्ट जुमला पार्टी बन गई है और नवाब मलिक ने उसे लगातार बेनकाब किया है....जब तक दोषी साबित नहीं हो जाता हर कोई बेगुनाह है। तो बीजेपी गलत आरोप कैसे लगा सकती है? मुझे विश्वास है कि अदालत न्याय देगी और नवाब मलिक को न्याय मिलेगा। हम उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।'

नवाब मलिक का रुख जानने के बाद अपनी बात रखूंगा- अजित पवार
इससे पहले एनसीपी का दूसरा खेमा यानि अजित पवार ने कहा था कि जब नवाब मलिक अपना स्टैंड आधिकारिक रूप से साफ कर देंगे, तभी इस मसले पर वे अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा, 'मुझे चिट्ठी मिली है। मैं अपनी बातें तभी रखूंगा जब मुझे पता चलेगा कि नवाब मलिक का आधिकारिक स्टैंड क्या है, विधानसभा में कौन कहां बैठता है ये मैं नहीं तय करता, यह फैसला स्पीकर करते हैं।'

नवाब मलिक पर बीजेपी को सख्त ऐतराज
दरअसल, यह मामला इसलिए सामने आया है कि कहा जा रहा है कि नवाब मलिक अजित पवार गुट के साथ मिल गए हैं, जिसकी वजह से महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन के बीच असहजता की स्थिति पैदा हो गई है। इसी वजह से आनन-फानन में फडणवीस ने अजित पवार को चिट्ठी लिख दी थी

नवाब मलिक पार्टी के प्रवक्ता हैं- अजित पवार गुट के नेता
अजित पवार ने फडणवीस की चिट्ठी के बाद जो प्रतिक्रिया दी है, उन्हीं के गुट के नेता अमोल मिटकरी की बातों में उससे अंतर नजर आ रहा है। उन्होंने कहा है, 'बैठने की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाती है। जब विधानसभा के स्पीकर ने सीटिंग अरेंजमेंट की हैं तो मुझे लगता है कि उन्हें जरूर ज्यादा पता होगा। नवाब मलिक पार्टी के प्रवक्ता हैं और वरिष्ठ नेता हैं। एनसीपी के हमारे प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कल स्थिति साफ कर दी थी। मैं इससे ठीक पहले अजित पवार से मिला, वे या पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता इसपर अपना स्टैंड साफ करेंगे।'

वैसे सुनील तटकरे ने गुरुवार को कहा था कि नवाब मलिक वर्षों पुराने वरिष्ठ सहयोगी हैं। वह स्वास्थ्य के आधार पर जेल से बाहर आए हैं। उनसे हम मिले, लेकिन उसमें कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई।

शिवसेना (यूबीटी) फडणवीस की चिट्ठी को कहा 'पाखंड'
इस मसले पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने नवाब मलिक को लेकर फडणवीस की ओर से अजित पवार को लिखी चिट्ठी को 'पाखंड' बताया है।

उन्होंने कहा, 'यह पाखंड है। उनके शब्दों और कार्यों में बहुत ज्यादा अंतर है....यह पाखंड इसलिए है कि वे सत्ता के मद में चूर हैं। जनता देख सकती है, बीजेपी ने महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जो समझौता किया है। लोग देख सकते हैं कि एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के साथ दगा किया है। लोग देख सकते हैं जो अजित पवार ने खुद को क्लीन चिट देने के लिए किया। इसलिए यह चिट्ठी पाखंड है।'

फडणवीस की चिट्ठी में क्या है?
दरअसल, नवाब मलिक को गुरुवार को नागपुर में चल रहे महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सत्तापक्ष के साथ बैठे देखा गया था। इसपर विपक्ष ने खासकर बीजेपी और उसके नेताओं को निशाना बनाना शुरू किया था। इसी के बाद फडणवीस ने अपने कैबिनेट सहयोगी अजित पवार को चिट्ठी लिखकर इसपर आपत्ति जताई और कहा कि नवाब मलिक जैसे नेताओं की वजह से गठबंधन में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा था कि 'सत्ता आती-जाती रहती है। लेकिन, देश सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण और सबसे ऊपर है। वे (नवाब मलिक) अभी सिर्फ मेडिकल ग्राउंड पर बेल पर बाहर हैं।'

गौरतलब है कि नवाब मलिक मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में उद्धव ठाकरे सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए जेल गए थे। उनपर देश के विरोधियों से भी साठगांठ के आरोप लग चुके हैं। फिर भी उद्धव ने उनसे इस्तीफा नहीं लिया था।

पिछले अगस्त में वह मेडिकल ग्राउंड पर जमानत लेकर जेल से बाहर आए हैं। इसी वजह से बीजेपी उन्हें सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल करने पर आपत्ति जता रही है। लेकिन, नवाब मलिक के प्रति एनसीपी के दोनों गुटों के साथ-साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना का भी समर्थन दिख रहा है। (इनपुट-एएनआई)

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